बॉलीवुड से दूर स्वतंत्र संगीतकारों ने बनाई दुनिया भर में पहचान
भारतीय स्वतंत्र संगीतकारों ने फिल्मी गानों के एकाधिकार को खत्म कर डिजिटल और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर अपनी मजबूत वैश्विक पहचान बनाई है।
मुंबई : भारतीय संगीत जगत में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है। आज के स्वतंत्र (इंडिपेंडेंट) कलाकार पारंपरिक बॉलीवुड प्लेबैक सिंगिंग के दायरे से बाहर निकलकर वैश्विक स्तर पर अपनी एक मजबूत और अनूठी पहचान बना रहे हैं। इस बदलाव ने देश के संगीत को नया आयाम दिया है, जिससे हिंदी संगीत पहले से कहीं अधिक विविध, प्रयोगात्मक और आधुनिक श्रोताओं से जुड़ा हुआ महसूस हो रहा है।
इस बदलाव का नेतृत्व कर रही हैं मोनाली ठाकुर जैसी स्थापित गायिका, जिन्होंने हाल ही में 'बटरफ्लाईज' प्रोजेक्ट के जरिए स्वतंत्र संगीत की ओर रुख किया। इसके 'नई मिलना वे' और 'पिया' जैसे गानों ने साबित कर दिया कि मुख्यधारा के कलाकार बिना किसी फिल्मी सहारे के भी चार्टबस्टर हिट दे सकते हैं। इसी तरह, गायक-गीतकार प्रतीक कुहाड़ ने 'कसूर' और 'खो गए हम कहाँ' जैसे गानों के दम पर देश-विदेश में एक बेहद वफादार प्रशंसक वर्ग तैयार किया है, जो उनके सिंपल और रस्टिक म्यूजिक को पसंद करता है।
डिजिटल युग ने कई ऐसे सुपरस्टार्स को जन्म दिया है जो स्ट्रीमिंग ऐप्स पर राज कर रहे हैं। अनुव जैन के दिल को छू लेने वाले गाने जैसे 'हुस्न' और 'बारिशें' युवाओं के लिए रोमांस की नई परिभाषा बन गए हैं। दूसरी ओर, ऋत्विज ने 'लिग्गी' और 'उड़ गए' जैसे चार्टबस्टर्स के जरिए भारतीय शास्त्रीय धुनों को इलेक्ट्रॉनिक डांस म्यूजिक (EDM) बीट्स के साथ खूबसूरती से जोड़ा है। वहीं, रैप और पॉप सनसनी किंग ने 'मान मेरी जान' और 'तू आके देख ले' जैसे स्वतंत्र गानों से देशव्यापी सफलता हासिल की है।
यह इंडी म्यूजिक इकोसिस्टम राघव चैतन्य और अनुमिता नादेसन जैसे कलाकारों के साथ लगातार बड़ा हो रहा है। राघव जहाँ अपनी रोमांटिक मैशअप से दिल जीत रहे हैं, वहीं शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षित अनुमिता डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 'तेनु संग रखना' जैसे गानों से धूम मचा रही हैं। बॉलीवुड के एकाधिकार को तोड़कर ये कलाकार आज के दौर का असली और स्वतंत्र भारतीय संगीत गढ़ रहे हैं।
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