त्रिशूर का 'महा-रेला': क्या केरल में खिलने वाला है कमल?
त्रिशूर में पीएम मोदी के ऐतिहासिक रोड शो ने केरल की राजनीति में हलचल मचा दी है। क्या यह जनसैलाब वोट में बदलेगा?
त्रिशूर, केरल: दक्षिण भारत की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले त्रिशूर की सड़कें कल इतिहास की गवाह बनीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 900 मीटर लंबा रोड शो महज एक राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि जनभावनाओं का एक ऐसा सैलाब था जिसने विरोधियों की नींद उड़ा दी है। स्वराज राउंड पर पैर रखने की जगह नहीं थी और हर तरफ सिर्फ फूलों की बारिश और 'मोदी-मोदी' की गूंज सुनाई दे रही थी।
इस रोड शो की सबसे खास बात थी केरल की पारंपरिक विरासत का प्रदर्शन। सड़क के दोनों ओर पुलीकली (टाईगर डांस) के कलाकार और कथकली की वेशभूषा में सजे लोगों ने पीएम का स्वागत किया। यह दृश्य दर्शाता है कि भाजपा अब केरल की जड़ों और उसकी संस्कृति में अपनी जगह बना चुकी है। छतों पर खड़े लोग, महिलाएं और युवाओं का जोश यह बता रहा था कि केरल का राजनीतिक मिजाज बदल रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि त्रिशूर का यह रोड शो आगामी चुनावों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। 2026 के चुनावी रण में भाजपा इस बार पूरी ताकत झोंक रही है। पीएम मोदी ने जिस तरह से स्थानीय लोगों से सीधा संवाद किया और फूलों की पंखुड़ियों के बीच जनता का अभिवादन स्वीकार किया, उसने एक मजबूत भावनात्मक जुड़ाव पैदा किया है।
क्या त्रिशूर का यह भगवा रंग पूरे केरल में फैलेगा? क्या पारंपरिक रूप से एलडीएफ और यूडीएफ के बीच बंटे इस राज्य में मोदी मैजिक कोई नया इतिहास रचेगा? इन सवालों के जवाब भविष्य के गर्भ में हैं, लेकिन कल की ऊर्जा ने यह साफ कर दिया है कि केरल अब बदलाव की राह पर है। (pib)
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