कुंडा में आर-पार की जंग: तहसीलदार के खिलाफ दूसरे दिन भी वकीलों का हल्ला बोल, दी तालाबंदी की चेतावनी
कुंडा में तहसीलदार अलख शुक्ला के खिलाफ अधिवक्ताओं का प्रदर्शन जारी। तानाशाही का आरोप लगाकर स्थानांतरण की मांग, तालाबंदी की चेतावनी।
कुंडा, प्रतापगढ़। कुंडा तहसील परिसर में तहसीलदार अलख शुक्ला के खिलाफ अधिवक्ताओं का विरोध प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। दि बार एसोसिएशन के महामंत्री योगेश कुमार त्रिपाठी ‘योगी’ के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर अपनी मांगों को दोहराया और जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की।अधिवक्ताओं ने तहसीलदार पर तानाशाही रवैया अपनाने, मनमाने ढंग से कार्य करने तथा न्यायालय में अनुचित व्यवहार करने के आरोप लगाए।
उनका कहना है कि न्यायालयीन कार्यवाही में शिष्टाचार का पालन नहीं किया जा रहा है और कई मामलों में फाइलों का निस्तारण आवास पर किया जा रहा है, जो न्यायिक प्रक्रिया के विरुद्ध है। इससे वादकारियों और अधिवक्ताओं दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विरोध प्रदर्शन के दूसरे दिन अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन एसडीएम वाचस्पति सिंह को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से तहसीलदार के स्थानांतरण की मांग की गई और चेतावनी दी गई कि मांग पूरी न होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
अधिवक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि जब तक तहसीलदार का स्थानांतरण नहीं किया जाएगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर तहसील परिसर में तालाबंदी करने की भी चेतावनी दी गई। प्रदर्शन में अपर उपाध्यक्ष नीरज पांडेय, महेंद्र प्रताप यादव, पूर्व अध्यक्ष तीरथ राज मिश्रा, पूर्व अध्यक्ष शीतला प्रसाद यादव, कनिष्ठ उपाध्यक्ष ओमप्रकाश ओझा, उपेंद्र प्रताप सिंह, प्रकाशन मंत्री अविनेश ओझा, प्रशासन मंत्री मंदीप कुमार त्रिपाठी, पुस्तकालय मंत्री राजेश कुमार गौतम, कोषाध्यक्ष सुशांत श्रीवास्तव, वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य भूपेंद्र यादव, पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष जय प्रताप सिंह, पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।
इसके अलावा कौशलेश पांडेय, दयाशंकर मिश्रा, रवी श्रीवास्तव, श्याम कृष्ण पांडेय, सिद्धनाथ सरोज, संतोष कुमार सरोज, धर्मराज पटेल, संतोष कुमार यादव, अरुण द्विवेदी, उमाकांत निर्मल, रवी सिंह, राहुल केशरी, पंकज शुक्ला, प्रदीप पांडेय समेत अन्य अधिवक्ताओं ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। प्रदर्शन के चलते तहसील का कार्य कुछ समय के लिए प्रभावित रहा, जिससे वादकारियों को असुविधा का सामना करना पड़ा। अब अधिवक्ताओं के इस आंदोलन पर प्रशासन के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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