Ambedkarnagar में किसानों को मिला प्राकृतिक खेती का गुरुमंत्र
अम्बेडकरनगर में जिला गंगा समिति द्वारा प्राकृतिक खेती और पौधारोपण को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।
अम्बेडकरनगर : धरती की उर्वरा शक्ति को बचाने और नदियों के अस्तित्व को सुरक्षित रखने के लिए अब सरकारी स्तर पर अनूठी पहल शुरू हो गई है। जिलाधिकारी श्रीमती ईशा प्रिया के दिशा-निर्देशन और प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. उमेश तिवारी के कुशल मार्गदर्शन में जिला गंगा समिति द्वारा विकासखंड जहांगीरगंज के ग्राम पंचायत तारेम में एक दिवसीय 'प्राकृतिक खेती एवं वनीकरण' कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक और रासायनिक मुक्त खेती को बढ़ावा देना था।
कार्यशाला में मुख्य प्रशिक्षक के रूप में मौजूद एलएनएफ आई के अध्यक्ष श्री संतोष सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती और वनीकरण एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने पर्यावरण संतुलन के लिए व्यापक स्तर पर पौधारोपण की आवश्यकता पर बल दिया। किसानों को व्यावहारिक सुझाव देते हुए उन्होंने कहा:
"किसान भाई अपने खेतों की मेड़ों पर औषधीय और छायादार पौधे लगाएं। साथ ही, मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को नष्ट होने से बचाने के लिए खेतों को कभी भी खाली न छोड़ें, बल्कि उसमें दलहन या अन्य सह-फसलों का चक्र अपनाएं।"
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से होने वाले नुकसानों के प्रति किसानों को आगाह किया। उन्हें घर पर ही जैविक उर्वरक, जीवामृत और घनजीवामृत तैयार करने की तकनीकी विधि सिखाई गई, ताकि खेती की लागत कम हो और फसलों की गुणवत्ता बढ़े।
इस मौके पर वन विभाग के डिप्टी रेंजर श्री शंकर मौर्य, वन दरोगा श्री गणेश यादव, नमामि गंगे के जिला परियोजना अधिकारी श्री सत्यम श्रीवास्तव सहित एफपीओ प्रतिनिधि और भारी संख्या में स्थानीय प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे। सभी ने पर्यावरण और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प लिया।
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