पिता बनने की उम्र: 25 बनाम 45, क्या पुरुषों की 'बायोलॉजिकल क्लॉक' भी टिक-टिक करती है?
जानें कैसे उम्र और लाइफस्टाइल पुरुषों की फर्टिलिटी को प्रभावित करते हैं। 25 और 45 की उम्र के बीच का वैज्ञानिक सच।
प्रयागराज : अक्सर माना जाता है कि बढ़ती उम्र का असर केवल महिलाओं की फर्टिलिटी पर पड़ता है, लेकिन विज्ञान की कहानी कुछ अलग है। बिरला फर्टिलिटी और आईवीएफ, प्रयागराज की विशेषज्ञ डॉ. मधुलिका सिंह के अनुसार, पुरुषों में भी एक 'बायोलॉजिकल क्लॉक' होती है जो समय के साथ उनकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है।
25 बनाम 45: शुक्राणुओं का सफर 25 की उम्र में एक पुरुष का शरीर फर्टिलिटी के चरम पर होता है। इस दौरान शुक्राणुओं की गतिशीलता (motility) तेज होती है और उनका डीएनए ढांचा मजबूत होता है। इसके विपरीत, 45 की उम्र तक पहुँचते-पहुँचते शुक्राणुओं की संख्या भले ही स्थिर दिखे, लेकिन उनकी गुणवत्ता में गिरावट आने लगती है। उम्र बढ़ने के साथ शुक्राणुओं के डीएनए में 'फ्रैगमेंटेशन' यानी टूट-फूट बढ़ जाती है, जिससे गर्भधारण में न केवल देरी हो सकती है, बल्कि जन्मजात स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम भी बढ़ सकता है।
लाइफस्टाइल: उम्र से भी बड़ा फैक्टर डॉ. सिंह स्पष्ट करती हैं कि उम्र केवल एक संख्या है, लेकिन आपकी आदतें असली निर्णायक हैं। 45 साल का एक फिट पुरुष, 25 साल के एक चैन-स्मोकर या तनावग्रस्त युवक से बेहतर शुक्राणु गुणवत्ता रख सकता है। शराब, धूम्रपान, मोटापा और नींद की कमी सीधे तौर पर 'ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस' बढ़ाते हैं, जो शुक्राणुओं के दुश्मन हैं।
समाधान और जाँच यदि आप 40 की उम्र के करीब हैं और परिवार शुरू करने की सोच रहे हैं, तो 'सीमेन एनालिसिस' (वीर्य जांच) एक सरल और प्रभावी कदम है। अच्छी खबर यह है कि महिलाओं के अंडों के विपरीत, पुरुषों के शुक्राणु हर 72 से 90 दिनों में नए बनते हैं। इसका मतलब है कि खान-पान में सुधार, नियमित व्यायाम और तनाव प्रबंधन के जरिए 3-4 महीनों में शुक्राणुओं की सेहत को काफी हद तक सुधारा जा सकता है।
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