भूटान की सड़कों पर दिखेगी भारतीय दोस्ती की रफ्तार: ई-मोबिलिटी प्रोजेक्ट से मिलेगी नई ऊर्जा
भारत की मदद से भूटान में दौड़ेगी 45 इलेक्ट्रिक बसें। 35 करोड़ से अधिक का हुआ करार, 2026 तक होगा परिचालन।
थिम्पू/नई दिल्ली। भारत और भूटान के बीच अटूट संबंधों की कड़ी में अब 'हरित परिवहन' (Green Transport) का एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। भारत सरकार की ‘ई-मोबिलिटी अपनाने में तेजी लाना’ परियोजना के तहत भूटान में न केवल सार्वजनिक परिवहन आधुनिक बनेगा, बल्कि वहां की कार्बन-नेगेटिव स्थिति को भी नई मजबूती मिलेगी।
45 ई-बसें और 30 चार्जिंग स्टेशनों का रोडमैप
थिम्पू स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य भूटान की ईवी रणनीति को सशक्त बनाना है। परियोजना के तहत निम्नलिखित कार्य किए जाएंगे:
- बस तैनाती: शहरी और इंटर-डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट के लिए 45 इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती की जाएगी।
- इंफ्रास्ट्रक्चर: पूरे देश में 30 चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
- सरकारी वाहन: सरकारी कामकाज के लिए ई-वाहनों का उपयोग बढ़ाया जाएगा।
- कौशल विकास: भूटानी इंजीनियरों और तकनीशियनों के लिए विशेष प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित होंगे।
35 करोड़ न्गुल्ट्रम का बड़ा करार
भूटान के बुनियादी ढांचा एवं परिवहन मंत्रालय ने स्विच मोबिलिटी ऑटोमोटिव लिमिटेड के साथ 350,415,000 न्गुल्ट्रम (भूटानी मुद्रा) का नौ महीने का अनुबंध साइन किया है। भारतीय सहायता (टाइड असिस्टेंस) से चलने वाला यह निवेश भूटान के सार्वजनिक परिवहन बेड़े को पूरी तरह बदल देगा। उम्मीद जताई गई है कि ये इलेक्ट्रिक बसें 2026 के अंत तक सड़क पर दौड़ने लगेंगी।
"भारत अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के तहत भूटान में ई-मोबिलिटी प्रयासों का समर्थन करके गर्व महसूस कर रहा है। यह परियोजना टिकाऊ परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम है।" — भारतीय दूतावास, थिम्पू
भारत केवल बसों के लिए ही नहीं, बल्कि उन्हें चलाने वाली बिजली के लिए भी भूटान का सहयोग कर रहा है। पुनात्सांगछू-II जैसी बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में भारत का निवेश यह सुनिश्चित करेगा कि इन ई-वाहनों को मिलने वाली ऊर्जा भी पूरी तरह स्वच्छ और रिन्यूएबल हो। इसके अलावा, दोनों देश सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए भी निरंतर कार्य कर रहे हैं।
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