अमेठी में digital homework पर लगा ब्रेक: 5वीं तक के बच्चों को अब मोबाइल नहीं, सीधे कॉपी पर मिलेगा काम
अमेठी में 5वीं तक मोबाइल होमवर्क पर रोक; बच्चों को स्क्रीन एडिक्शन से बचाने के लिए बीएसए का सख्त आदेश जारी।
अमेठी। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से शिक्षा जगत और बाल मनोविज्ञान को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। जिला बेसिक शिक्षा विभाग ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए कक्षा 5वीं तक के छात्रों को मोबाइल के माध्यम से होमवर्क या किसी भी प्रकार की शैक्षणिक गतिविधि देने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) संजय तिवारी ने राज्य महिला आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को इस बाबत कड़े निर्देश जारी किए हैं।
इस प्रतिबंध के पीछे का मुख्य कारण बच्चों में बढ़ती मोबाइल की लत और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाला दुष्प्रभाव है। हाल ही में गाजियाबाद में मोबाइल गेमिंग की लत के चलते तीन बहनों द्वारा एक साथ आत्महत्या करने के दुखद मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता सिंह चौहान ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए सभी जिलों को पत्र लिखकर बच्चों को डिजिटल साधनों से दूर रखने की सिफारिश की थी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
उल्लेखनीय है कि आधिकारिक तौर पर विभाग ने कभी मोबाइल होमवर्क का आदेश नहीं दिया था। कोविड काल के दौरान मजबूरी में शुरू हुई यह प्रक्रिया धीरे-धीरे एक परंपरा बन गई थी, जिसे निजी और सरकारी स्कूल धड़ल्ले से अपना रहे थे। अब बीएसए के आदेश के बाद शिक्षकों को अनिवार्य रूप से कक्षा में ही डायरी या कॉपी पर होमवर्क देना होगा।
इस फैसले से न केवल बच्चों का मानसिक तनाव कम होगा, बल्कि उन गरीब अभिभावकों को भी बड़ी राहत मिलेगी जिनके पास महंगे एंड्रॉयड फोन उपलब्ध नहीं हैं। अब शिक्षा का आधार फिर से पुरानी पद्धति यानी 'पेन और पेपर' होगा, जिससे बच्चों की लिखावट और एकाग्रता में सुधार होने की उम्मीद है।
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