मथुरा के जंगलों पर 'माफिया' का आरा: धौरेरा में उजड़ रहे वन्यजीवों के आशियाने, कुंभकर्णी नींद में सोया वन विभाग
मथुरा के धौरेरा और अक्रूर जंगलों में वन माफियाओं का कहर। पेड़ों की कटान से वन्यजीवों की मौत, प्रशासन बेखबर।
मथुरा (सुमित गोस्वामी): सरकार जहाँ एक ओर करोड़ों का बजट खर्च कर 'वृक्षारोपण अभियान' के जरिए धरती को हरा-भरा करने का दावा कर रही है, वहीं कान्हा की नगरी में वन माफिया इस मुहिम को पलीता लगा रहे हैं। जिले के धौरेरा और अक्रूर के जंगलों में इन दिनों माफियाओं का नंगा नाच चल रहा है, जहाँ बेशकीमती पेड़ों को काटकर जंगल को मैदान में तब्दील किया जा रहा है।
रात के सन्नाटे में चीखती आरा मशीनें
स्थानीय निवासियों के अनुसार, संरक्षित वन क्षेत्रों में माफियाओं का नेटवर्क इतना मजबूत है कि रात के अंधेरे में बेखौफ होकर पेड़ों की कटान की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि जहाँ रात भर आरा मशीनों की गूंज सुनाई देती है, वहीं वन विभाग की गश्ती टीमें गायब रहती हैं। जंगल के भीतर दर्जनों ताजे ठूंठ विभाग की कथित 'ईमानदारी' और मुस्तैदी की गवाही दे रहे हैं।
- बेजुबानों पर टूटा कहर: मौत और पलायन
जंगलों की इस अंधाधुंध कटाई का सबसे भयावह असर वन्यजीवों पर पड़ रहा है। पेड़ों के कटने से: - कई जंगली जानवरों की असामयिक मृत्यु हो गई है।
- बेघर हुए वन्यजीव अब रिहायशी इलाकों की ओर भाग रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बढ़ गया है।
- जैव विविधता पूरी तरह संकट में है।
अधिकारियों का वही पुराना राग: "जांच करेंगे"
मथुरा में वन कटान का यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी बड़े पैमाने पर लकड़ी तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं। जब इस गंभीर विषय पर विभागीय अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने एसी कमरों से बाहर निकले बिना ही अपना रटा-रटाया जवाब दे दिया— "मामला संज्ञान में नहीं है, जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी।" अब सवाल यह उठता है कि क्या विभाग वास्तव में अनभिज्ञ है या माफियाओं के इस 'तांडव' को मूक सहमति दी गई है?
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