विदेश में नौकरी का सपना होगा आसान: विदेश मंत्रालय का PDOT प्रोग्राम बना वरदान, 2.3 लाख युवाओं को मिली ट्रेनिंग
विदेश मंत्रालय के PDOT प्रोग्राम से 2.3 लाख से अधिक भारतीयों को मिली विदेश में नौकरी के लिए मुफ्त ट्रेनिंग।
नई दिल्ली। विदेश में रोजगार की तलाश कर रहे भारतीय युवाओं के लिए विदेश मंत्रालय का प्री-डिपार्चर ओरिएंटेशन ट्रेनिंग (PDOT) कार्यक्रम एक मजबूत ढाल और मददगार साथी बनकर उभरा है। राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने बताया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से अब तक 2,30,342 प्रशिक्षुओं को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया जा चुका है।
क्या है PDOT और इसके उद्देश्य?
2018 में शुरू हुआ यह कार्यक्रम 'सुरक्षित, प्रशिक्षित और विश्वास के साथ जाएं' के मूल मंत्र पर आधारित है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रवासी श्रमिकों को गंतव्य देश की संस्कृति, भाषा, परंपरा और वहां के स्थानीय नियमों से अवगत कराना है।
इस ट्रेनिंग की प्रमुख विशेषताएं:
- मुफ्त प्रशिक्षण: यह 8 घंटे का एक निशुल्क ओरिएंटेशन प्रोग्राम है।
- बहुभाषी संसाधन: मास्टर ट्रेनर्स के लिए मैनुअल को 7 भाषाओं (हिंदी, अंग्रेजी, बांग्ला, मलयालम, पंजाबी, तमिल और तेलुगु) में तैयार किया गया है।
- व्यापक पहुंच: वर्तमान में देश भर में 47 पीडीओटी केंद्र संचालित हैं, जिनमें से 16 एनएसडीसी (NSDC) और 31 राज्य सरकारों के माध्यम से चलाए जा रहे हैं।
डिजिटल इंडिया से मिली नई रफ्तार
राज्यमंत्री ने सदन को सूचित किया कि जो लोग फिजिकल सेंटरों से दूर रहते हैं, उनके लिए अप्रैल 2021 में ऑनलाइन पीडीओटी लॉन्च किया गया था। यह पहल विशेष रूप से खाड़ी देशों में जाने वाले उन श्रमिकों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है, जो अक्सर भाषा और नियमों की अनभिज्ञता के कारण समस्याओं का सामना करते हैं।
सुरक्षित माइग्रेशन की दिशा में बड़ा कदम
यह ट्रेनिंग न केवल सॉफ्ट स्किल्स बढ़ाती है, बल्कि प्रवासी मजदूरों को सुरक्षित एवं कानूनी माइग्रेशन के तरीकों और सरकार द्वारा चलाई जा रही वेलफेयर स्कीमों के प्रति जागरूक भी करती है। राज्यसभा सांसद डॉ. भीम सिंह के प्रश्न का उत्तर देते हुए राज्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पाठ्यक्रम का मानकीकरण (Standardization) पूरे देश में एक समान रखा गया है ताकि गुणवत्ता बनी रहे।
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