गौ सेवा ही सुशासन का आधार: अंबेडकरनगर में गौ संरक्षण कार्यों की समीक्षा

Apr 23, 2026 - 20:53
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गौ सेवा ही सुशासन का आधार: अंबेडकरनगर में गौ संरक्षण कार्यों की समीक्षा

अम्बेडकरनगर: प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल निराश्रित गौवंश के संरक्षण को लेकर जनपद में सक्रियता बढ़ गई है। कलेक्ट्रेट सभागार में उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ल एवं सदस्य दीपक गोयल की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक संपन्न हुई, जिसमें गौशालाओं के प्रबंधन और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।

बैठक में स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही:

  • प्रमुख उपस्थित: जिला पंचायत अध्यक्ष श्याम सुंदर वर्मा, बीजेपी जिलाध्यक्ष त्र्यंबक तिवारी, पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) आनंद कुमार शुक्ला।
  • निर्देश: उपाध्यक्ष ने निर्देश दिया कि शासन की मंशा के अनुरूप गौवंश संरक्षण को धरातल पर उतारा जाए। उन्होंने डीसी मनरेगा को चारागाह विकास और उपजिलाधिकारियों को गोचर भूमि चिन्हित करने के आदेश दिए।

उत्तर प्रदेश सरकार की गौ-संरक्षण नीति के प्रमुख बिंदु
उपाध्यक्ष महेश शुक्ल ने राज्य सरकार द्वारा उठाए जा रहे क्रांतिकारी कदमों पर प्रकाश डाला:

योजना/पहल विवरण
भरण-पोषण भत्ता उत्तर प्रदेश पहला राज्य है जहाँ गौवंश के लिए ₹50 प्रतिदिन की दर से राशि दी जा रही है।
गौ-आश्रय स्थल प्रदेश भर में 7700+ सक्रिय गौ-आश्रय स्थल संचालित हैं।
निगरानी प्रणाली पारदर्शिता के लिए 5446 गोशालाओं में 7592 सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए गए हैं।
सहभागिता योजना अब तक 1.67 लाख से अधिक गौवंश जिम्मेदार गौपालकों को सौंपे जा चुके हैं।

अंबेडकरनगर जनपद की प्रगति रिपोर्ट
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने जनपद के आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि:

  • वर्तमान में जिले में 39 गौ-आश्रय स्थल क्रियाशील हैं।
  • इनमें 10,572 गौवंश का पालन-पोषण हो रहा है।

सहभागिता योजना के तहत 1,682 गौपालकों ने 2,461 गौवंश को अपनाया है, जिसका भुगतान सीधे उनके बैंक खातों (DBT) में किया जा रहा है।

बैठक में स्पष्ट किया गया कि उ०प्र० गोवध निवारण अधिनियम 1955 के तहत गौवंश की सुरक्षा के प्रति सरकार प्रतिबद्ध है। किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन पर 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उपाध्यक्ष ने भ्रामक प्रचार से बचने की अपील करते हुए कहा कि अधिकारी नियमित रूप से आश्रय स्थलों का भ्रमण कर व्यवस्थाओं पर पैनी नजर रख रहे हैं।

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