एनजीटी ने कुल्लू में नेहरू पार्क को डंपिंग ग्राउंड बनाने पर लगाई रोक

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में नेहरू पार्क के भीतर कचरा डंपिंग और निर्माण पर रोक लगा दी है।

Jul 06, 2026 - 17:14
Updated: 4 hours ago
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एनजीटी ने कुल्लू में नेहरू पार्क को डंपिंग ग्राउंड बनाने पर लगाई रोक

शिमला : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन केंद्र कुल्लू में पर्यावरण नियमों के गंभीर उल्लंघन का पर्दाफाश किया है। ट्रिब्यूनल ने कुल्लू के सरवरी स्थित नेहरू पार्क को आंशिक रूप से डंपिंग ग्राउंड में बदलने और वहां ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र (एमआरएफ) बनाने की कोशिशों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।  

एनजीटी के न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी की पीठ ने कुल्लू प्रशासन, विशेष रूप से नगर परिषद और जिला मजिस्ट्रेट को आदेश दिया है कि सार्वजनिक पार्क के भीतर किसी भी प्रकार की कचरा डंपिंग, निर्माण गतिविधि या भूमि उपयोग में बदलाव को तुरंत रोका जाए। ट्रिब्यूनल ने साफ तौर पर कहा कि शहरों और रिहायशी इलाकों में स्थित ग्रीन बेल्ट और पार्क वहां के 'फेफड़ों' की तरह काम करते हैं और वायु गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इनका संरक्षण बेहद जरूरी है।

इन पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।  यह सख्त कदम कुल्लू के निवासी संजय कपूर द्वारा दायर एक याचिका के बाद उठाया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि जिस नेहरू पार्क को लाखों रुपये के सार्वजनिक धन से बच्चों के खेलने और आम लोगों के टहलने के लिए विकसित किया गया था, उसे नगर परिषद खुद ही मलबे और बेकार सचल शौचालयों को खड़ा कर बर्बाद कर रही थी। हद तो तब हो गई जब 13 अप्रैल 2026 को नगर परिषद ने पार्क के भीतर ही एक 'मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी' (कचरा छंटनी केंद्र) के निर्माण के लिए शॉर्ट-टर्म टेंडर जारी कर दिया।

 यह प्रस्तावित संयंत्र ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 का सीधा उल्लंघन था। नियमों के अनुसार, ऐसा कोई भी संयंत्र किसी नदी से कम से कम 100 मीटर और हवाई अड्डे से 20 किलोमीटर दूर होना चाहिए। जबकि यह पार्क ब्यास की मुख्य सहायक नदी सरवरी के तट से महज 30 मीटर की दूरी पर और भुंतर हवाई अड्डे से 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित है। एनजीटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त जांच समिति का गठन कर एक महीने के भीतर जमीनी रिपोर्ट मांगी है।

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