बेंगलुरु में 11 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ, गूंजा विश्व कल्याण का संदेश

बेंगलुरु के मेधा दक्षिणामूर्ति मंदिर में संपन्न हुए 11 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में श्रद्धालुओं ने राष्ट्र निर्माण की आहुतियाँ दीं।

Jun 15, 2026 - 18:13
Updated: 2 hours ago
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बेंगलुरु में 11 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ, गूंजा विश्व कल्याण का संदेश

बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में अध्यात्म और राष्ट्रभक्ति का एक अनूठा संगम देखने को मिला। मागड़ी रोड स्थित चेन्नेनहल्ली के प्रसिद्ध मेधा दक्षिणामूर्ति मंदिर परिसर में 11 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का भव्य आयोजन किया गया। युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के सूक्ष्म सान्निध्य में आयोजित इस आध्यात्मिक अनुष्ठान का नेतृत्व दीर्घायु योग केंद्र ने किया, जिसमें सुरेश एन. और राघवेंद्र एल. ने अपना विशेष सहयोग प्रदान किया। इस महायज्ञ में 200 से अधिक संस्कारी श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आहुतियाँ देकर विश्व शांति और समर्थ भारत की कामना की।

समारोह के मुख्य अतिथि एवं वेद विज्ञान गुरुकुलम् के कुलाधिपति प्रोफेसर रामचंद्रजी भट्ट ने अपने उद्बोधन से जनसमुदाय को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने सदियों से संकुचित दायरों में सिमटे गायत्री महामंत्र को जन-जन के लिए सुलभ कराकर वैश्विक स्तर पर एक महान वैचारिक और आध्यात्मिक क्रांति को जन्म दिया है। गुरुदेव के कठोर तप का ही सुफल है कि आज गायत्री मंत्र किसी जाति या वर्ग विशेष का न होकर पूरी मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

प्रोफेसर भट्ट ने यज्ञ के वैज्ञानिक पक्ष को उजागर करते हुए कहा कि यह भारतीय संस्कृति की वह अनमोल धरोहर है, जो न केवल पर्यावरण को शुद्ध करती है बल्कि व्यक्ति और समाज के चरित्र का भी निर्माण करती है। आज के इस संक्रमण काल में यज्ञीय जीवन शैली, नैतिकता और मानवीय मूल्यों को अपनाना बेहद ज़रूरी हो गया है।

इस मौके पर गायत्री परिवार कर्नाटक के प्रबुद्ध कार्यकर्ताओं ने 'यज्ञ से राष्ट्र निर्माण' का संकल्प दोहराया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, सदाचार और नई पीढ़ी में संस्कारों के संवर्धन के लिए आगे आने की अपील की। सामूहिक दीपयज्ञ और प्रार्थना के साथ इस भव्य अनुष्ठान का समापन हुआ, जिसने पूरे वातावरण को दिव्य ऊर्जा से सराबोर कर दिया।

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