Birla IVF : Infertility की डायग्नोसिस के लिए एक सीमन एनालिसिस काफी क्यों नहीं होता

स्पर्म बनने में करीब 70 से 90 दिन लगते हैं। इसका मतलब है कि सैंपल देने से पहले के हफ्तों में पुरुष की सेहत और लाइफस्टाइल रिपोर्ट को प्रभावित कर सकते हैं।

Jun 19, 2026 - 18:57
Updated: 5 hours ago
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Birla IVF : Infertility की डायग्नोसिस के लिए एक सीमन एनालिसिस काफी क्यों नहीं होता

वाराणसी :  इनफर्टिलिटी के लगभग 50% मामलों में पुरुष फैक्टर शामिल होता है। इसलिए पुरुष फर्टिलिटी की सही जांच बहुत जरूरी है। सीमन एनालिसिस आमतौर पर पहली जांच होती है, क्योंकि इससे स्पर्म काउंट, मूवमेंट और बनावट के बारे में अहम जानकारी मिलती है। लेकिन एक रिपोर्ट को अकेले पूरी डायग्नोसिस नहीं माना जा सकता।

डॉ. प्रगति भारती, फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, वाराणसी का कहना है कि स्पर्म बनने में करीब 70 से 90 दिन लगते हैं। इसका मतलब है कि सैंपल देने से पहले के हफ्तों में पुरुष की सेहत और लाइफस्टाइल रिपोर्ट को प्रभावित कर सकते हैं। हाल का बुखार, बीमारी, ज्यादा तनाव, नींद की कमी, कुछ दवाइयां, शराब का सेवन या एक्टिविटी लेवल में बदलाव कुछ समय के लिए स्पर्म काउंट, मूवमेंट और क्वालिटी पर असर डाल सकते हैं। ऐसे में एक रिपोर्ट को पेशेंट की हेल्थ हिस्ट्री और मौजूदा स्थिति के साथ समझना जरूरी होता है।

इसी वजह से डॉक्टर कई मामलों में एक से ज्यादा सीमन एनालिसिस कराने की सलाह देते हैं, खासकर जब पहली रिपोर्ट असामान्य हो, बॉर्डरलाइन हो या दंपति की फर्टिलिटी हिस्ट्री से मेल न खा रही हो। सही तरीके से सैंपल देने और उचित अंतराल के बाद दोबारा जांच करने से यह समझने में मदद मिलती है कि रिपोर्ट में दिख रहा बदलाव अस्थायी है या लगातार बना हुआ है। अगर दो रिपोर्ट्स में ज्यादा अंतर हो, तो इलाज की दिशा तय करने से पहले तीसरी जांच भी सलाह दी जा सकती है।

सामान्य सीमन एनालिसिस पुरुष फर्टिलिटी के हर पहलू को नहीं दिखाता। स्पर्म डीएनए फ्रैगमेंटेशन, हार्मोन जांच, स्पर्म फंक्शन टेस्ट और कुछ मामलों में जेनेटिक टेस्टिंग की जरूरत हो सकती है। कई बार स्पर्म काउंट, मूवमेंट और बनावट सामान्य दिखने के बाद भी आगे की जांच जरूरी हो सकती है, खासकर जब इनफर्टिलिटी का कारण साफ न दिख रहा हो।

पुरुष इनफर्टिलिटी की सही डायग्नोसिस के लिए सिर्फ एक टेस्ट रिपोर्ट काफी नहीं होती। सीमन एनालिसिस एक जरूरी शुरुआत है, लेकिन इसे हेल्थ हिस्ट्री, जरूरत पड़ने पर दोबारा जांच और पूरी फर्टिलिटी इवैल्यूएशन के साथ समझना चाहिए। इससे दंपति को सही कारण समझने और इलाज की सही दिशा तय करने में मदद मिलती है।

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