Birla IVF : Infertility की डायग्नोसिस के लिए एक सीमन एनालिसिस काफी क्यों नहीं होता
स्पर्म बनने में करीब 70 से 90 दिन लगते हैं। इसका मतलब है कि सैंपल देने से पहले के हफ्तों में पुरुष की सेहत और लाइफस्टाइल रिपोर्ट को प्रभावित कर सकते हैं।
इसी वजह से डॉक्टर कई मामलों में एक से ज्यादा सीमन एनालिसिस कराने की सलाह देते हैं, खासकर जब पहली रिपोर्ट असामान्य हो, बॉर्डरलाइन हो या दंपति की फर्टिलिटी हिस्ट्री से मेल न खा रही हो। सही तरीके से सैंपल देने और उचित अंतराल के बाद दोबारा जांच करने से यह समझने में मदद मिलती है कि रिपोर्ट में दिख रहा बदलाव अस्थायी है या लगातार बना हुआ है। अगर दो रिपोर्ट्स में ज्यादा अंतर हो, तो इलाज की दिशा तय करने से पहले तीसरी जांच भी सलाह दी जा सकती है।
सामान्य सीमन एनालिसिस पुरुष फर्टिलिटी के हर पहलू को नहीं दिखाता। स्पर्म डीएनए फ्रैगमेंटेशन, हार्मोन जांच, स्पर्म फंक्शन टेस्ट और कुछ मामलों में जेनेटिक टेस्टिंग की जरूरत हो सकती है। कई बार स्पर्म काउंट, मूवमेंट और बनावट सामान्य दिखने के बाद भी आगे की जांच जरूरी हो सकती है, खासकर जब इनफर्टिलिटी का कारण साफ न दिख रहा हो।
पुरुष इनफर्टिलिटी की सही डायग्नोसिस के लिए सिर्फ एक टेस्ट रिपोर्ट काफी नहीं होती। सीमन एनालिसिस एक जरूरी शुरुआत है, लेकिन इसे हेल्थ हिस्ट्री, जरूरत पड़ने पर दोबारा जांच और पूरी फर्टिलिटी इवैल्यूएशन के साथ समझना चाहिए। इससे दंपति को सही कारण समझने और इलाज की सही दिशा तय करने में मदद मिलती है।
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