आपदा के 1 साल बाद भी नहीं बदले हालात: कुल्लू के अखाड़ा बाजार में 200 परिवारों पर फिर मंडराया लैंडस्लाइड का खतरा
कुल्लू के अखाड़ा बाजार में आपदा के 1 साल बाद भी सुरक्षा कार्य ठप हैं, जिससे 200 परिवारों पर फिर लैंडस्लाइड का खतरा मंडरा रहा है।
कुल्लू : हिमाचल प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही जिला कुल्लू के मुख्यालय अखाड़ा बाजार क्षेत्र में पुरानी दहशत और जख्म एक बार फिर हरे हो गए हैं। पिछले साल 3 सितंबर 2025 को इनर अखाड़ा में हुई भीषण लैंडस्लाइड त्रासदी को लोग भूले नहीं हैं, जिसमें 10 मासूम जिंदगियां काल के गाल में समा गई थीं और कई आशियाने जमींदोज हो गए थे। बेहद अफसोस की बात है कि इस भयानक त्रासदी के करीब 11 महीने बीत जाने के बाद भी प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा के कोई पुख्ता और स्थायी इंतजाम नहीं किए गए हैं।
प्रशासनिक लेटलतीफी के कारण इस मानसून में भी अखाड़ा बाजार के करीब 200 परिवारों के सिर पर भूस्खलन की तलवार लटक रही है।
कागजों में अटका 8 करोड़ का बजट, सुरक्षा कार्य ठप
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि आपदा के बाद से वे लगातार प्रशासन और संबंधित विभागों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं बदला। सरकार की ओर से इस संवेदनशील प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा कार्यों के लिए करीब 8 करोड़ रुपये का बजट जारी होना था। लेकिन लालफीताशाही का आलम यह है कि तीन चरणों में चलने वाली इस प्रक्रिया का अभी पहला चरण ही पूरा हो पाया है।
जल शक्ति विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, दूसरे चरण के लिए अभी 'इन-प्रिंसिपल अप्रूवल' (सैद्धांतिक मंजूरी) मिलना बाकी है, जिसके बाद ही तीसरे चरण में राशि स्वीकृत होगी। इस प्रशासनिक सुस्ती के बीच, पहाड़ी से लगातार हो रहे पानी के रिसाव ने मिट्टी को बेहद कमजोर कर दिया है, जो किसी भी वक्त बड़े मलबे में तब्दील हो सकती है।
बेघर हुए लोग, सीवरेज सिस्टम बना मुसीबत
अखाड़ा बाजार के लोगों का दर्द और गुस्सा अब सरकार के खिलाफ फूटने लगा है। स्थानीय निवासियों ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं:
घर छोड़ कर कहां जाएं? स्थानीय निवासी नीलकंठ सूद ने बताया कि जल शक्ति विभाग की रिपोर्ट में खुद माना गया है कि सीवरेज के मेनहोल ओवरफ्लो होने के कारण यहां जमीन धंस रही है। लेकिन समाधान करने के बजाय प्रशासन मानसून आते ही घर खाली करने का नोटिस थमा देता है।
किराए के भी लाले: पिछले साल की आपदा में अपने बेटे को खोने वाले सुदर्शन सांख्यान आज भी किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने शुरू में सिर्फ 6 महीने का किराया दिया, जो अब बंद हो चुका है। पहाड़ी से गिरा पुराना मलबा तक नहीं हटाया गया है।
अधिकारियों का तर्क: जल शक्ति विभाग कुल्लू के अधिशासी अभियंता अमित कुमार का कहना है कि सुरक्षा दीवार निर्माण के लिए अभी सिर्फ स्टेज-1 की अनुमति मिली है। स्टेज-2 और स्टेज-3 की औपचारिकताएं पूरी होते ही बजट स्वीकृत होगा और काम शुरू करा दिया जाएगा।
बड़ा सवाल: जब तक सीवरेज के मेनहोल ठीक नहीं होंगे और सुरक्षा दीवार नहीं बनेगी, तब तक अखाड़ा बाजार पर खतरा टलना नामुमकिन है। क्या प्रशासन किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
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