मुख्यमंत्री का आह्वान: बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए करें समर्पित प्रयास
मुख्यमंत्री ने बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए समर्पित प्रयासों का आह्वान किया, बाल श्रम और अपराधों पर ज़ीरो टॉलरेंस के निर्देश।
शिमला । मुख्यमंत्री ने बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके सुरक्षित भविष्य को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक में कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग यानी बच्चों के अधिकारों का संरक्षण करना सरकार और नागरिक दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बाल श्रम, बाल तस्करी और बच्चों के साथ होने वाले अपराधों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाने को कहा है।
मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि हर बच्चे को शिक्षा, स्वास्थ्य और एक सुरक्षित माहौल पाने का जन्मसिद्ध अधिकार है। उन्होंने शिक्षा विभाग को निर्देशित किया कि कोई भी बच्चा स्कूल जाने से वंचित न रहे, विशेषकर वंचित वर्ग के बच्चों के लिए संचालित योजनाओं की जमीन पर सख्त निगरानी की जाए। इसके साथ ही बाल सुधार गृहों की स्थिति को और बेहतर बनाने तथा अनाथ व बेसहारा बच्चों के पुनर्वास के लिए समर्पित प्रयास करने पर बल दिया।
सख्त कार्रवाई और जागरूकता अभियान के निर्देश
बैठक में मुख्यमंत्री ने पुलिस और महिला एवं बाल कल्याण विभाग को आपसी समन्वय से काम करने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि:
बाल विवाह और बाल श्रम जैसी कुप्रथाओं को रोकने के लिए ग्रामीण स्तर तक विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
बच्चों के खिलाफ अपराध करने वाले अपराधियों को त्वरित और सख्त सजा दिलाने के लिए फॉस्ट ट्रैक अदालतों की मदद ली जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक सुरक्षित और शिक्षित बचपन ही सशक्त राष्ट्र की नींव रखता है, इसलिए इस कार्य में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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