कौशाम्बी: अझुवा क्षेत्र में ओवरलोड बालू ट्रैक्टरों का तांडव, नई सड़कें हो रहीं जमींदोज; सिस्टम फेल
कौशाम्बी के अझुवा और कनवार में ओवरलोड बालू ट्रैक्टरों से सड़कें टूट रही हैं। प्रशासन की चुप्पी से ग्रामीणों में भारी रोष है
(एडवोकेट अजय पण्डा / ब्यूरो)
कौशाम्बी। जनपद के अझुवा सहित कनवार और धुमाई इलाकों में ओवरलोड बालू लदे ट्रैक्टरों ने आतंक मचा रखा है। इन भारी-भरकम वाहनों के बेखौफ आवागमन से न केवल करोड़ों की लागत से बनी सड़कें जर्जर हो रही हैं, बल्कि राहगीरों की जान पर भी हर वक्त खतरा मंडरा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी के बावजूद इन पर कोई लगाम नहीं कसी जा रही है।
ओवरलोडिंग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते 3 मार्च को कनवार गांव में एक नई बनी सड़क ओवरलोड ट्रैक्टर का वजन नहीं सह सकी और धंस गई। ट्रैक्टर सड़क तोड़ते हुए सीधे नाले में जा गिरा था। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों के कड़े विरोध के बाद अब ट्रैक्टर चालकों ने रिहायशी इलाकों और संकरी गलियों को अपना नया रास्ता बना लिया है।
ग्रामीणों के गुस्से से बचने के लिए अब ये बालू माफिया धुमाई रेलवे ओवरब्रिज और अझुवा बस्ती के भीतर से ट्रैक्टर निकाल रहे हैं। घनी आबादी वाले इन रास्तों से भारी वाहनों के गुजरने के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। विशेष रूप से स्कूली बच्चों और दुपहिया वाहन चालकों के लिए ये 'यमराज' के दूत साबित हो रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हाईवे के भोला चौराहा पर ट्रैफिक पुलिस तैनात रहती है, लेकिन बालू लदे ये ट्रैक्टर उनकी आंखों के सामने से बेधड़क निकल जाते हैं। पुलिस और संबंधित विभाग की इस रहस्यमयी चुप्पी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जनता की मांग: क्षेत्रीय लोगों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि इन ओवरलोड ट्रैक्टरों का परमिट निरस्त किया जाए और ग्रामीण सड़कों को बर्बादी से बचाने के लिए इनके प्रवेश पर तत्काल रोक लगाई जाए।
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