लखनऊ: सीएम योगी का बड़ा फैसला, मानसिक मंदित व निराश्रित दिव्यांगजनों का मासिक अनुदान बढ़कर हुआ ₹3,000

सीएम योगी आदित्यनाथ ने दिव्यांगजनों का अनुदान ₹2,000 से बढ़ाकर ₹3,000 किया; सहायक उपकरण शिविर और कॉक्लियर इम्प्लांट के दिए निर्देश

Jul 02, 2026 - 21:52
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लखनऊ: सीएम योगी का बड़ा फैसला, मानसिक मंदित व निराश्रित दिव्यांगजनों का मासिक अनुदान बढ़कर हुआ ₹3,000

लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज राजधानी लखनऊ में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के कार्यों की उच्च स्तरीय समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने मानसिक मंदित (Mentally Challenged) एवं निराश्रित दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए एक बड़ा संवेदनशील निर्णय लिया। सरकार ने आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्रों और 'हाफ वे होम' में रह रहे संवासियों के भरण-पोषण के लिए दी जाने वाली अनुदान राशि को ₹2,000 से बढ़ाकर ₹3,000 प्रतिमाह करने का फैसला किया है।

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिव्यांगजनों की देखभाल में किसी भी प्रकार की कमी न छोड़ने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा: "आश्रय गृहों में रहने वाले मानसिक मंदित और निराश्रित दिव्यांगजन पूरी तरह से संस्थागत देखभाल पर निर्भर होते हैं। उन्हें पौष्टिक भोजन, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और एक गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करना हमारी सरकार की सर्वोच्च सामाजिक जिम्मेदारी है।"

बैठक में दिव्यांगजनों के सामाजिक, आर्थिक और शारीरिक पुनर्वास को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए:

नियमित उपकरण वितरण शिविर: सीएम ने निर्देश दिया कि उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपद में नियमित रूप से 'दिव्यांगजन सहायक उपकरण वितरण शिविर' आयोजित किए जाएं। पात्र लाभार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार कृत्रिम अंग और व्हीलचेयर, बैसाखी जैसे सहायक उपकरण तुरंत उपलब्ध कराए जाएं।

श्रवण बाधित बच्चों का पुनर्वास: जन्म से सुनने में अक्षम (श्रवण बाधित) बच्चों की शीघ्र पहचान (Early Identification) की जाए। इसके बाद समय सीमा के भीतर उनका कॉक्लियर इम्प्लांट (Cochlear Implant) कराया जाए और ऑपरेशन के बाद उनके उचित पुनर्वास व स्पीच थेरेपी की व्यवस्था सुनिश्चित हो।

विशेष विद्यालयों का कायाकल्प: राज्य के विशेष विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रशिक्षित शिक्षक (Special Educators) और आधुनिक बाधारहित (Barrier-Free) वातावरण तैयार किया जाए। शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए समयबद्ध तैनाती के निर्देश दिए गए हैं ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

मुख्यमंत्री ने अंत में स्पष्ट किया कि विभाग की सभी योजनाओं का अंतिम लक्ष्य दिव्यांगजनों को समाज में सम्मानजनक, सुरक्षित और आत्मनिर्भर जीवन देना है, इसलिए जमीनी स्तर पर सभी नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

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