राज्यपाल ने 'भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा' के पुरस्कार विजेताओं को किया सम्मानित
राज्यपाल ने राजभवन में आयोजित 'भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा' के मेधावी छात्रों को नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
Shimla:राजभवन में आयोजित एक भव्य और गरिमामयी समारोह में माननीय राज्यपाल ने 'भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा' के मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया। शांतिकुंज, हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित इस राज्य स्तरीय परीक्षा का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को भारत के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और नैतिक मूल्यों से अवगत कराना है। कार्यक्रम में प्रदेश भर के विभिन्न विद्यालयों से आए शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को नकद पुरस्कार, पदक और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ हमारी प्राचीन संस्कृति और संस्कारों का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल किताबी ज्ञान से किसी राष्ट्र का सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता; इसके लिए चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्यों का होना अनिवार्य है। 'भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा' जैसी अनूठी पहल बच्चों में देशप्रेम, माता-पिता के प्रति आदर और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना जागृत करने में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।
इस वर्ष की परीक्षा में रिकॉर्ड संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों का प्रदर्शन बेहद सराहनीय रहा। राज्यपाल ने विशेष रूप से बेटियों की सफलता की सराहना करते हुए कहा कि जब एक बेटी शिक्षित और संस्कारी होती है, तो वह पूरे समाज को नई दिशा देती है। कार्यक्रम के अंत में शांतिकुंज के प्रतिनिधियों ने राज्यपाल को स्मृति चिह्न और विचार क्रांति वांग्मय साहित्य भेंट किया। इस अवसर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षाविद, गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में अभिभावक तथा शिक्षक उपस्थित रहे।
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