भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शिक्षा ही विकसित भारत की वास्तविक आधारशिला: अशोक गांगुली

लखनऊ में भारतीय शिक्षा दिवस पर आयोजित राष्ट्रीय विमर्श में सीबीएसई के पूर्व अध्यक्ष अशोक गांगुली ने कहा- भारतीय ज्ञान परंपरा ही विकसित भारत की आधारशिला है

Jul 02, 2026 - 21:47
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भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शिक्षा ही विकसित भारत की वास्तविक आधारशिला: अशोक गांगुली

लखनऊ : भारतीय शिक्षा दिवस के पावन अवसर पर राजधानी के गोमती नगर स्थित श्री राकेश कुमार मित्तल सभागार (स्मृति भवन) में एक भव्य राष्ट्रीय विमर्श का आयोजन किया गया। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (अवध प्रांत), एकम नॉलेज फाउंडेशन (अयोध्या) और कबीर शान्ति मिशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी का मुख्य विषय "पंचकोष आधारित चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास: भारतीय ज्ञान परंपरा के आलोक में" रहा। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, लोक सेवकों, प्राध्यापकों और प्रबुद्ध नागरिकों ने हिस्सा लेकर देश की भावी शिक्षा व्यवस्था पर गहन मंथन किया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के पूर्व अध्यक्ष श्री अशोक गांगुली ने अपने संबोधन में आधुनिक शिक्षा में भारतीय मूल्यों के समावेश पर विशेष बल दिया।

श्री अशोक गांगुली ने कहा: "भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शिक्षा ही विकसित भारत की वास्तविक आधारशिला है। नई शिक्षा व्यवस्था तभी सार्थक सिद्ध होगी, जब उसमें भारतीय चिंतन, नैतिक मूल्यों और चरित्र निर्माण को केंद्र में रखा जाएगा।" उन्होंने पंचकोष आधारित शिक्षा प्रणाली को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का सबसे प्रभावी और वैज्ञानिक आधार बताया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं पूर्व प्रमुख सचिव (राज्यपाल) श्री जी. बी. पटनायक ने भी इस विचार का समर्थन करते हुए कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल रोजगार पाना नहीं, बल्कि संस्कारित, चरित्रवान और राष्ट्रनिष्ठ नागरिकों का निर्माण करना है।

विमर्श के दौरान शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के विशिष्ट अतिथि श्री नितिन कासलीवाल ने देशभर में चल रहे भारतीय शिक्षा जागरण अभियान और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला। वहीं प्रांत संयोजक श्री प्रमिल द्विवेदी ने न्यास की गतिविधियों से सभी को अवगत कराया।

कार्यक्रम में विज्ञान और अध्यात्म का अद्भुत समन्वय तब देखने को मिला जब कनाडा से अंतरराष्ट्रीय मनोवैज्ञानिक डॉ. अमरेश श्रीवास्तव का एक विशेष ऑडियो संदेश प्रसारित किया गया। उन्होंने अपने संदेश में मनोमय कोष और न्यूरोसाइंस (मस्तिष्क विज्ञान) के आपसी संबंध को बेहद सरल और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से स्पष्ट किया। इसके अलावा, श्री चिंतामणि कौशिक ने पंचकोष आधारित व्यक्तित्व विकास की व्यावहारिक कार्ययोजना भी सामने रखी।

इससे पूर्व, कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती की वंदना से हुआ। त्रिवेणी कला संगम की सुश्री नितिका शर्मा और उनकी टीम ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जबकि श्रीमती रजनी शुक्ला की टीम ने पंचकोष आधारित ध्यान और नाम-संकीर्तन कराकर पूरे सभागार को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

कार्यक्रम के अंत में एक संवाद और प्रश्नोत्तर सत्र हुआ, जहां उपस्थित शोधार्थियों और शिक्षाविदों ने विशेषज्ञों से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान पाया। अंत में कबीर शान्ति मिशन के मुख्य समन्वयक श्री राजेश अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और कार्यक्रम का सफल संचालन श्री व्रत देव पाण्डेय ने किया।

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