उच्च शिक्षा के बाद भी ₹6,000 की नौकरी: हिमाचल में हजारों MTW कर्मचारियों के सब्र का बांध टूटा
शिमला: हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) में तैनात 4,832 मल्टी टास्क वर्कर्स (MTW) का धैर्य अब जवाब दे चुका है। एमए (MA) और एमएससी (MSc) जैसी उच्च डिग्रियां होने के बावजूद महज 6 हजार रुपये मासिक मानदेय पर 8 से 10 घंटे हाड़-तोड़ सेवा देने वाले ये युवा अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। लगातार बढ़ती महंगाई और सरकार के खोखले आश्वासनों से तंग आकर कर्मचारियों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
अपनी मांगों को लेकर एमटीडब्ल्यू वर्कर्स यूनियन के एक प्रतिनिधिमंडल ने पीडब्ल्यूडी मंत्री विक्रमादित्य सिंह से मुलाकात की और उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी सेवा नीति को लेकर जल्द कोई ठोस फैसला नहीं लिया, तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।
यूनियन की प्रमुख मांगें:
- दैनिक वेतनभोगी का दर्जा: 4 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके सभी MTW कर्मियों को तुरंत डेलीवेजर का दर्जा दिया जाए।
- स्पष्ट सेवा नीति: 8 से 10 घंटे की नियमित ड्यूटी के आधार पर एक स्थायी और न्यायसंगत पॉलिसी बनाई जाए।
- भविष्य की सुरक्षा: 48 वर्ष से अधिक आयु वाले कर्मियों के लिए ओपीएस (OPS) जैसी सामाजिक सुरक्षा का प्रावधान हो।
- निश्चित वेतन तिथि व अवकाश: पूरे राज्य में सैलरी के लिए एक तारीख तय हो और महिला कर्मियों को मातृत्व अवकाश मिले।
- "इस कमरतोड़ महंगाई में ₹6,000 में परिवार पालना मुमकिन नहीं है। राशन, बच्चों की पढ़ाई और दवाई का खर्च उठाना दूभर हो गया है। सरकार को हमारी सुध लेनी ही होगी।" - शेर सिंह, प्रदेशाध्यक्ष (MTW यूनियन)
इसके साथ ही यूनियन ने मंडी जिले में दुर्घटना के शिकार हुए एमटीडब्ल्यू कर्मी देवेंद्र के परिवार के लिए उचित मुआवजे और न्याय की मांग भी पुरजोर तरीके से उठाई है। कर्मचारियों का साफ कहना है कि अब शांतिपूर्ण अपीलों का वक्त खत्म हो चुका है, अब सरकार को समयबद्ध कार्रवाई करनी होगी।
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