रसड़ा सीएचसी: इलाज के नाम पर सिर्फ मरहम-पट्टी, विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव में दम तोड़ती स्वास्थ्य सेवाएं
चिकित्सकों की कमी और अव्यवस्थाओं के कारण रसड़ा सीएचसी बना 'रेफरल सेंटर', बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे मरीज
रसड़ा (बलिया): उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित 30 बेड वाला रसड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) इन दिनों सफेद हाथी साबित हो रहा है। आलम यह है कि जिस अस्पताल पर एक बड़ी आबादी के स्वास्थ्य का जिम्मा है, वह खुद 'बीमार' होकर केवल रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। बाल रोग विशेषज्ञ और एमडी जैसे विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण यहां मरीजों को केवल प्राथमिक मरहम-पट्टी नसीब हो रही है, जबकि गंभीर रोगियों को तत्काल रेफर कर दिया जाता है।
जिम्मेदारों की खामोशी और कोरा आश्वासन
अस्पताल की इस दुर्दशा के पीछे विभागीय उदासीनता और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों का उपेक्षापूर्ण रवैया साफ झलकता है। लंबे समय से यहां बाल रोग विशेषज्ञ और एमडी की तैनाती की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से हर बार केवल 'कोरा आश्वासन' ही मिलता है। चर्चा तो यह भी है कि विभागीय उच्चाधिकारी दबाव में आकर यहां तैनात सुयोग्य चिकित्सकों का स्थानांतरण कर देते हैं, जिससे स्थानीय जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है।
अव्यवस्थाओं का अंबार: सफाई से लेकर बिजली तक संकट
- अस्पताल के भीतर सिर्फ डॉक्टरों की ही कमी नहीं है, बल्कि बुनियादी सुविधाएं भी वेंटिलेटर पर हैं:
- सफाई व्यवस्था: मानक के अनुसार 3-4 सफाईकर्मी होने चाहिए, लेकिन मात्र एक कर्मी के भरोसे पूरा परिसर है। वार्डों और प्रसव कक्ष में गंदगी का बोलबाला रहता है।
- पेयजल संकट: पिछले तीन महीनों से आरओ प्लांट खराब पड़ा है, जिसे ठीक कराने की जहमत किसी ने नहीं उठाई।
- बिजली की समस्या: पांच महीने पहले नया जनरेटर आने की चर्चा थी, लेकिन वह आज तक अस्पताल नहीं पहुंचा।
जनता में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि आखिर कब तक रसड़ा की जनता को बेहतर इलाज के लिए दूसरे शहरों की दौड़ लगानी होगी। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है या फिर आश्वासन की घुट्टी पिलाकर इसी तरह व्यवस्था को चलाया जाएगा?
(रिपोर्ट-अखिलेश सैनी)
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