बदहाली की भेंट चढ़ा आलापुर का 25 शैय्या वाला राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल, स्टाफ नदारद और 2 साल से दवाएं गायब
अम्बेडकरनगर के आलापुर में राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल कर्मचारियों की कमी और दवाओं के अभाव में खुद बीमार है, मरीज परेशान हैं।
अम्बेडकरनगर। जनपद के आलापुर क्षेत्र में आयुर्वेदिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित श्रीमती गायत्री देवी राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय आज खुद 'इलाज' की बाट जोह रहा है। 25 शैय्याओं वाले इस अस्पताल की स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि यहाँ आने वाले मरीज स्वास्थ्य लाभ के बजाय निराशा लेकर लौट रहे हैं। संसाधनों की कमी और प्रशासनिक उपेक्षा ने इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र को सफेद हाथी में तब्दील कर दिया है।
कर्मचारियों का टोटा: वार्ड बॉय के भरोसे दवा वितरण
अस्पताल की सबसे बड़ी समस्या मानव संसाधन का अभाव है। यहाँ लंबे समय से फार्मासिस्ट का पद रिक्त है। नियमानुसार बिना फार्मासिस्ट के दवाओं का वितरण नहीं होना चाहिए, लेकिन विडंबना देखिए कि यहाँ कभी डॉक्टर तो कभी वार्ड बॉय को दवा बांटते देखा जा सकता है। क्षेत्र के छोटे केंद्रों पर स्टाफ मौजूद है, लेकिन इस बड़े अस्पताल की अनदेखी समझ से परे है।
योग केंद्र पर लटका ताला, दवाओं का अकाल
आयुष विभाग के दावों की पोल यहाँ का 'योग एवं वेलनेस सेंटर' खोल रहा है। कागजों पर नियुक्तियों के दावे तो हैं, लेकिन धरातल पर केंद्र बंद पड़ा है। योग के जरिए निरोगी होने का सपना देख रहे क्षेत्रीय लोग इस सुविधा से पूरी तरह वंचित हैं।
इससे भी अधिक गंभीर बात यह है कि पिछले दो वर्षों से अस्पताल में दवाओं की आपूर्ति ठप है। चिकित्सक मरीजों का चेकअप तो करते हैं, लेकिन अस्पताल की डिस्पेंसरी खाली होने के कारण उन्हें बाहर की महंगी दवाएं लिखने पर मजबूर होना पड़ता है। गरीब ग्रामीणों के लिए निजी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदना संभव नहीं हो पा रहा है।
विकास पुरुष के सपनों पर फिर रहा पानी
बता दें कि इस चिकित्सालय की नींव वर्ष 1995 में क्षेत्र के विकास पुरुष सालिक शुक्ला के प्रयासों से पड़ी थी, जिसका शिलान्यास तत्कालीन दिग्गज नेता मोतीलाल वोरा ने किया था। मकसद था ग्रामीण अंचल को आयुर्वेद की शक्ति से जोड़ना। लेकिन तीन दशक बीतने के बाद भी यह अस्पताल अपने पूर्ण स्वरूप में संचालित नहीं हो सका है।
प्रशासन से गुहार
क्षेत्रीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और आयुष विभाग से अस्पताल की सुध लेने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि यहाँ फार्मासिस्ट की नियुक्ति हो जाए, योग केंद्र दोबारा शुरू हो और दवाओं का कोटा बहाल कर दिया जाए, तो आलापुर की हजारों की आबादी को सीधा लाभ मिलेगा।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0