बड़ा खुलासा: अकबरपुर सीएससी प्रभारी डॉ. नूर आलम का 'अवैध' अस्पताल, सरकारी आदेशों को ठेंगा दिखा धड़ल्ले से चल रहा मौत का खेल!

अकबरपुर सीएससी प्रभारी डॉ. नूर आलम पर बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल चलाने का आरोप। सरकारी नियमों की उड़ रही धज्जियां, प्रशासन मौन।

Mar 15, 2026 - 21:26
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बड़ा खुलासा: अकबरपुर सीएससी प्रभारी डॉ. नूर आलम का 'अवैध' अस्पताल, सरकारी आदेशों को ठेंगा दिखा धड़ल्ले से चल रहा मौत का खेल!

अम्बेडकरनगर। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक तरफ भ्रष्टाचार और माफियागिरी पर 'बुलडोजर' चला रही है, तो दूसरी तरफ जनपद के अकबरपुर में एक सरकारी तंत्र का जिम्मेदार चेहरा ही नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए 'अवैध साम्राज्य' चला रहा है। सनसनीखेज खुलासे में सामने आया है कि अकबरपुर सीएससी (CSC) प्रभारी डॉ. नूर आलम खुद एक अनरजिस्टर्ड अस्पताल का संचालन कर रहे हैं। यह मामला न केवल सरकार के सख्त आदेशों की अवहेलना है, बल्कि गरीब मरीजों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ भी है।

हैरानी की बात यह है कि डॉ. नूर आलम, जिन पर क्षेत्र के अस्पतालों और पैथोलॉजी सेंटरों की निगरानी और व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी है, उन पर खुद के अस्पताल को अवैध तरीके से चलाने का आरोप लगा है। सूत्रों का दावा है कि डॉक्टर साहब न केवल अपना अनरजिस्टर्ड अस्पताल चला रहे हैं, बल्कि गुपचुप तरीके से अस्पतालों और पैथोलॉजी सेंटरों की खरीद-फरोख्त (सेटलमेंट) के धंधे में भी लिप्त हैं।

'क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट' और उत्तर प्रदेश सरकार के हालिया निर्देशों के अनुसार, कोई भी सरकारी डॉक्टर निजी प्रैक्टिस या अपना निजी अस्पताल संचालित नहीं कर सकता। सरकार ने इसके लिए विशेष ऐप और निगरानी तंत्र भी विकसित किया है। बावजूद इसके, डॉ. नूर आलम का अस्पताल बिना किसी वैध रजिस्ट्रेशन के सालों से फल-फूल रहा है। सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में यह 'घोटाला' फल-फूल रहा है?

स्थानीय नागरिकों में इस खुलासे के बाद भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर साहब दूसरों के क्लीनिकों पर छापेमारी का डर दिखाकर अपना व्यवसाय चमका रहे हैं। एक स्थानीय नागरिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो न्याय की उम्मीद किससे करें? स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने आखिर अब तक इस ओर से अपनी आंखें क्यों मूंद रखी हैं?"

यह खुलासा अब सीधे तौर पर स्वास्थ्य विभाग, जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाता है। क्या सरकार के जीरो टॉलरेंस की नीति का पालन करते हुए इस अवैध अस्पताल को तुरंत सील किया जाएगा? क्या डॉ. नूर आलम के विरुद्ध विभागीय जांच और निलंबन की कार्रवाई होगी? जनता अब प्रशासन से जवाब और एक्शन का इंतजार कर रही है।

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