व्यक्ति या संगठन में नहीं, असली शक्ति समाज में निहित है— आरएसएस प्रांत प्रचारक श्रीराम

कानपुर में धर्म जागरण समन्वय के कार्यक्रम में आरएसएस प्रांत प्रचारक श्रीराम ने कहा- संगठन नहीं, समाज में होती है असली शक्ति

Jun 14, 2026 - 19:45
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व्यक्ति या संगठन में नहीं, असली शक्ति समाज में निहित है— आरएसएस प्रांत प्रचारक श्रीराम

कानपुर (संजय शुक्ला / ब्यूरो) : "एक समय था जब भारत अपने ज्ञान, अध्यात्म और वैश्विक व्यापार के दम पर समूचे विश्व का नेतृत्व करता था और विश्वगुरु कहलाता था। उस दौर में भारत का विकास एकांगी नहीं बल्कि सर्वांगीण था। वह हमारी सामूहिक चेतना और शक्ति थी, जो धर्म सत्ता के रूप में समाज को संचालित करती थी। भारतीय संस्कृति हमेशा से संकुचित दायरे से ऊपर उठकर 'वसुधैव कुटुंबकम' और विश्व कल्याण की कामना करती आई है।"

यह उद्गार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कानपुर प्रांत प्रचारक श्रीराम जी ने व्यक्त किए। वे जरौली स्थित कृष्णा फाउंडेशन एकेडमी में 'धर्म जागरण समन्वय कानपुर दक्षिण' द्वारा आयोजित मंदिरों के आचार्यों और पुरोहितों की एक विशेष गोष्ठी एवं सम्मान समारोह को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।

प्रांत प्रचारक ने सामाजिक एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि वास्तविक शक्ति किसी एक व्यक्ति या संगठन की बपौती नहीं होती, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक चेतना में वास करती है। आज पश्चिमी देशों के लोग भौतिकता की चकाचौंध के बाद भी मानसिक शांति के लिए तरस रहे हैं। वे सुख और शांति की तलाश में भारत खिंचे चले आते हैं और हमारी मजबूत पारिवारिक व कुटुंब संस्कृति से प्रभावित होते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रसिद्ध पनकी मंदिर के महंत जितेंद्र दास महाराज ने समसामयिक और जनसांख्यिकीय चुनौतियों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि विभाजन और प्रताड़ना के बाद अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से विस्थापित होकर हिंदू भारत आए और यहीं बस गए। पूरी दुनिया में मुस्लिम और ईसाइयों के लिए कई मुल्क हैं, लेकिन हिंदुओं के लिए एकमात्र सुरक्षित आश्रय हिंदुस्तान ही है। उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि देश के 28 राज्यों में से 9 राज्यों में हिंदू अब अल्पसंख्यक की श्रेणी में आ गए हैं, जो सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से एक अत्यंत चिंतनीय विषय है।

"जब तक हमारा समाज संगठित नहीं होगा, तब तक हम अपनी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा नहीं कर पाएंगे। आचार्यों और पुरोहितों का यह दायित्व है कि वे समाज को धर्म के सही मार्ग पर लाएं।"

— महंत जितेंद्र दास महाराज, पनकी मंदिर

इस वैचारिक गोष्ठी के दौरान धर्म जागरण के प्रांत संयोजक नरेश शास्त्री, पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी सुरेंद्र शर्मा, विभाग समन्वयक शैलेंद्र और भाग संयोजक आलोक तिवारी ने भी अपने विचार रखे।

समारोह के मुख्य आकर्षण के रूप में मंच पर आसीन अतिथियों द्वारा क्षेत्र के पं. राम विलास शर्मा, महेश चंद्र, उमाशंकर तिवारी, नरेंद्र, धर्मेंद्र, कृष्ण प्रसाद, रेखा अवस्थी, सुधा कुशवाहा और प्रतिका अग्रवाल सहित लगभग 160 कर्मकांडी आचार्यों व पुरोहितों को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का कुशल संचालन विश्वकांत मिश्रा ने किया और आगंतुकों के प्रति आभार प्रदर्शन ओम पाठक द्वारा किया गया। इस ऐतिहासिक समागम में कृष्णा फाउंडेशन के चेयरमैन राज नारायण द्विवेदी, वीरेंद्र मिश्रा, राम प्रकाश, देवेश त्रिपाठी, राम बहादुर, रामजी हिंदू, विमल परिहार, मुनीश शुक्ला, योगेंद्र सचान और अजय त्रिपाठी सहित सैकड़ों की संख्या में प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।

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