विश्व जल दिवस पर प्रतापगढ़ में गूँजा संरक्षण का मंत्र, सक्षम फाउण्डेशन ने दिलाई जल शपथ

विश्व जल दिवस पर सक्षम फाउण्डेशन ने अवधेशपुरम् में जगाई जल संरक्षण की अलख। डॉ. रणजीत सिंह ने दिलाई पानी बचाने की शपथ।

Mar 22, 2026 - 19:47
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विश्व जल दिवस पर प्रतापगढ़ में गूँजा संरक्षण का मंत्र, सक्षम फाउण्डेशन ने दिलाई जल शपथ

कुंडा (प्रतापगढ़)। "पानी की एक-एक बूंद भविष्य की अमानत है और इसे सहेजना हम सबका सामूहिक दायित्व है।" इसी संकल्प के साथ विश्व जल दिवस के अवसर पर सक्षम फाउण्डेशन भुपियामऊ द्वारा अवधेशपुरम् ऐंठू में एक विशाल जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने गिरते भूजल स्तर पर चिंता जताते हुए 'कैच द रेन' अभियान को सफल बनाने का आह्वान किया।

घटता जल स्तर भविष्य के लिए खतरे की घंटी
सक्षम फाउण्डेशन के अध्यक्ष डॉ. रणजीत सिंह ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि कभी कुओं और तालाबों से समृद्ध रहने वाली हमारी धरती आज प्यासी हो रही है। उन्होंने बताया कि हर साल 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाने का मूल उद्देश्य दुनिया को पानी की अहमियत समझाना है। भारत सरकार के "कैच द रेन" (वर्षा जल संचय) अभियान के तहत इस वर्ष "जल है तो कल है, जल संरक्षण ही समाधान" के नारे को जन-जन तक पहुँचाया जाएगा।

खेती और जीवन में पानी बचाने के गुर
कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. यतेन्द्र कुमार ने जल संरक्षण के तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों और ग्रामीणों को महत्वपूर्ण सुझाव दिए:

  • आधुनिक सिंचाई: खेती में ड्रिप और स्प्रिंकलर (फव्वारा) पद्धति अपनाएं ताकि कम पानी में अधिक उपज मिले।
  • नमी संरक्षण: खेतों में मल्चिंग का प्रयोग करें और कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता दें।
  • रेन वाटर हार्वेस्टिंग: घरों की छतों से गिरने वाले वर्षा जल को टैंकों या सोख्ता गड्ढों के माध्यम से जमीन में रिचार्ज करें।
  • पर्यावरण सुरक्षा: अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें और जल स्रोतों को प्लास्टिक व कचरे से मुक्त रखें।

सामूहिक शपथ से हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में डॉ. रणजीत सिंह ने उपस्थित सभी नागरिकों को पानी का दुरुपयोग न करने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने की शपथ दिलाई। इस मौके पर अमित श्रीवास्तव, जीआर पटेल, आशुतोष श्रीवास्तव, पंकज सिंह सहित कंचन पटेल, रूबी सिंह, देविका सरोज और आरूषि वर्मा जैसे जागरूक नागरिकों ने सहभागिता की। सभी ने एक स्वर में कहा कि जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का परम कर्तव्य है।

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