रसड़ा: स्थायी ट्रैफिक पुलिस के अभाव में 'रॉन्ग साइड' ड्राइविंग का बोलबाला, बढ़ रहा हादसों का ग्राफ
रसड़ा में स्थायी ट्रैफिक पुलिस न होने से बढ़ी सड़क दुर्घटनाएं; गलत दिशा में वाहन चलाने वालों की लगी भीड़।
(अखिलेश सैनी)
रसड़ा (बलिया): शासन और प्रशासन द्वारा सुरक्षित यातायात के लाख दावों के बावजूद रसड़ा नगर क्षेत्र में सड़क सुरक्षा के नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। रसड़ा के प्रमुख चौराहों पर स्थायी ट्रैफिक पुलिस की तैनाती न होने के कारण वाहन चालकों में कानून का खौफ खत्म होता नजर आ रहा है, जिसका सीधा असर सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि के रूप में सामने आ रहा है।
प्रमुख चौराहों पर अव्यवस्था का अंबार
नगर के सबसे व्यस्ततम इलाकों— प्यारेलाल चौराहा, भगत सिंह तिराहा, चंद्रशेखर आजाद चौराहा और मुंसफी तिराहा—पर स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। इन स्थानों पर ट्रैफिक पुलिस की स्थायी अनुपस्थिति का फायदा उठाकर लोग बेखौफ होकर गलत दिशा (Wrong Side) में वाहन चला रहे हैं। बिना हेलमेट बाइक चलाना और यातायात संकेतों की अनदेखी करना अब यहां की आम बात हो गई है।
अस्थायी तैनाती से मिली थी राहत, पर अब बढ़ी मुसीबत
करीब डेढ़ साल पहले जिला प्रशासन ने बढ़ते हादसों को देखते हुए रसड़ा में अस्थायी रूप से ट्रैफिक पुलिस तैनात की थी। उस दौरान पुलिस की सख्ती का असर दिखा था और नियमों का उल्लंघन करने वालों की संख्या में भारी गिरावट आई थी।
- दहशत का असर: जब ट्रैफिक पुलिस तैनात रहती है, तो प्रतिदिन औसतन 40 से 50 वाहनों का चालान काटा जाता है, जिससे चालकों में डर बना रहता है।
- अव्यवस्था की वापसी: वर्तमान में स्थायी पुलिस न होने से कभी-कभार होने वाली चालान की कार्रवाई ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है।
जनता की मांग: स्थायी समाधान कब?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ कागजों पर अभियान चलाने या कभी-कभार चालान काटने से ट्रैफिक व्यवस्था नहीं सुधरेगी। जब तक इन प्रमुख तिराहों और चौराहों पर स्थायी ट्रैफिक बूथ और पुलिसकर्मियों की तैनाती नहीं होगी, तब तक दुर्घटनाओं पर लगाम लगाना नामुमकिन है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन रसड़ा की इस गंभीर समस्या पर ध्यान देगा या फिर जनता इसी तरह 'रॉन्ग साइड' ड्राइविंग के कारण अपनी जान जोखिम में डालती रहेगी?
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)