'समाधान' के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति: कोखराज थाने में बिना राजस्व अधिकारियों के सिमटा समाधान दिवस, निराश लौटे फरियादी

कौशाम्बी के कोखराज थाना समाधान दिवस में राजस्व अधिकारियों के न पहुँचने से भड़के फरियादी। 25 में से 22 मामले जमीन विवाद के।

Jun 13, 2026 - 22:15
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'समाधान' के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति: कोखराज थाने में बिना राजस्व अधिकारियों के सिमटा समाधान दिवस, निराश लौटे फरियादी

कौशाम्बी। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जनता की शिकायतों के त्वरित और मौके पर निस्तारण के लिए 'थाना समाधान दिवस' जैसी महत्वाकांक्षी व्यवस्था शुरू की थी। सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि जमीन से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से मौजूद रहें। लेकिन कौशाम्बी के कोखराज थाने में अधिकारियों की लापरवाही के चलते यह पूरी व्यवस्था अब महज 'आँख मिचौली का खेल' बनकर रह गई है।

शनिवार (13 जून 2026) को आयोजित समाधान दिवस में एक बार फिर सिराथू तहसील का कोई भी जिम्मेदार राजस्व अधिकारी नहीं पहुँचा। नतीजतन, दूर-दराज से न्याय की आस लेकर आए फरियादी खुद को ठगा सा महसूस करते हुए मायूस होकर लौट गए।

25 में से 22 मामले सिर्फ जमीन विवाद के
राजस्व अधिकारियों की इस बेरुखी का असर शनिवार को साफ देखने को मिला। समाधान दिवस में अपनी फरियाद लेकर कुल 25 लोग पहुँचे थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 22 मामले सीधे तौर पर जमीनी विवाद से जुड़े थे। चूंकि मौके पर सिराथू तहसील का कोई बड़ा जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था, इसलिए इन गंभीर मामलों का मौके पर निस्तारण होना नामुमकिन था।

राजस्व विभाग के आला अधिकारियों की अनुपस्थिति में एसएसआई (SSI) धर्मेंद्र सिंह ने मोर्चा संभाला और सभी 25 फरियादियों की शिकायतें दर्ज कीं। इस दौरान केवल 2 गैर-जमीनी मामलों का ही मौके पर निपटारा किया जा सका।

कागजों में सिमट रहा निस्तारण, बढ़ रहा कानून व्यवस्था का संकट
हर बार की तरह इस बार भी बाकी बचे सभी जमीनी मामलों को अधीनस्थों को सौंप दिया गया। स्थानीय लोगों और पीड़ितों का आरोप है कि बड़ी चौकियों और थानों से मिलने वाले ये निर्देश सिर्फ कागजी खानापूर्ति तक सीमित रह जाते हैं। मौके पर जाकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।

फरियादियों का आक्रोश: "जमीनी विवादों का समय पर निस्तारण न होने के कारण गांवों में आपसी रंजिशें बढ़ रही हैं, जिससे कानून व्यवस्था चौपट होने की कगार पर है। जब जिम्मेदार अधिकारी ही नहीं आएंगे, तो समाधान कैसा?"

इनकी उपस्थिति में संपन्न हुई जनसुनवाई
राजस्व विभाग के बड़े अधिकारियों के न आने के बावजूद, थाना स्तर पर जनसुनवाई की औपचारिकता पूरी की गई। इस मौके पर क्राइम इंस्पेक्टर विनय विक्रम सिंह, भरवारी चौकी प्रभारी नितेश त्रिपाठी सहित कुछ हल्के के राजस्व लेखपाल मौजूद रहे, जिनमें सोहन लाल सिंह, लक्ष्मी नारायण, पूनम यादव, सुनील द्विवेदी, नेहा जैन, दिलीप कुमार, अपर्णा श्रीवास्तव, नित्या पाल और अनुराधा वर्मा आदि शामिल थे।

अब सवाल यह उठता है कि मुख्यमंत्री पोर्टल और सरकार के कड़े रुख के बावजूद, सिराथू तहसील के लापरवाह अधिकारी आखिर कब तक जनता की समस्याओं को ठंडे बस्ते में डालते रहेंगे?

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