शिक्षा की लौ जलाने वाली माता सावित्रीबाई फुले का त्याग अतुलनीय', गोंड समाज ने अर्पित की श्रद्धांजलि
अम्बेडकरनगर में अखिल भारतीय गोंड आदिवासी संघ ने प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि पर उनके संघर्षों को याद किया।
अम्बेडकरनगर। देश में महिला शिक्षा की अलख जगाने वाली और नारी सशक्तिकरण की प्रणेता, माता सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि जनपद में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर अखिल भारतीय गोंड आदिवासी संघ (उत्तर प्रदेश) की जनपद शाखा द्वारा एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों ने उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ के जिलाध्यक्ष सुनील कुमार गोंड ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने उस कठिन दौर में शिक्षा का दीप प्रज्वलित किया, जब महिलाओं और वंचित समाज के लिए कलम पकड़ना एक बड़ी चुनौती थी। उन्होंने कहा, "माता सावित्रीबाई का जीवन साहस और संकल्प की वह गाथा है, जिसने समाज की रूढ़ियों को तोड़कर उपेक्षित वर्गों के लिए प्रगति के द्वार खोले। आज जो नारी शक्ति शिखर पर है, उसकी नींव माता फुले के संघर्षों पर टिकी है।"
जिलाध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि गोंड सगा-समाज सदैव उनके आदर्शों से प्रेरणा लेता है और शिक्षा के माध्यम से सामाजिक जागरूकता फैलाने के संकल्प को दोहराता है। इस दौरान समाज के गणमान्य व्यक्तियों ने माता सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके पदचिन्हों पर चलने की शपथ ली। वक्ताओं ने उनके जीवन को सामाजिक समता और मानवीय मूल्यों का जीवंत उदाहरण बताया।
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