यूपी में 30 हजार वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण खारिज: घबराएं नहीं, जानें दोबारा आवेदन का तरीका और डेडलाइन
यूपी में 30 हजार वक्फ संपत्तियां रिजेक्ट, जानें पोर्टल पर सुधार की प्रक्रिया और 6 जून 2026 की समयसीमा का महत्व।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण की मुहिम के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार के वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के तहत 'उम्मीद पोर्टल' (Ummid Portal) पर चल रहे पंजीकरण में शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड की करीब 30,000 संपत्तियों के आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए हैं। इस खबर के बाद वक्फ हलकों में हड़कंप है, लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह अंत नहीं बल्कि सुधार का एक अवसर है।
क्यों रिजेक्ट हुए हजारों आवेदन?
वक्फ बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, आवेदनों के खारिज होने के पीछे कोई राजनीतिक कारण नहीं बल्कि तकनीकी खामियां हैं। मुख्य रूप से निम्नलिखित त्रुटियां पाई गई हैं:
- दस्तावेजों में विसंगति: खसरा-खतौनी और वक्फ के कागजों में जानकारी का मिलान न होना।
- गलत वक्फ नंबर: एक ही वक्फ नंबर पर कई संपत्तियों का इंद्राज करने की कोशिश।
- चौहद्दी की जानकारी: संपत्ति की सीमाओं (चौहद्दी) का स्पष्ट उल्लेख न होना।
- डाटा एंट्री में चूक: पोर्टल पर फॉर्म भरते समय खसरा नंबर या अन्य विवरण गलत दर्ज करना।
रिजेक्शन का मतलब 'वक्फ' खत्म होना नहीं
अधिकारियों ने साफ तौर पर कहा है कि रिजेक्शन का यह मतलब कतई नहीं है कि वह संपत्ति अब वक्फ की नहीं रही। यह केवल पोर्टल पर पंजीकरण की तकनीकी प्रक्रिया में आई रुकावट है। मुतवल्ली और संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति इन कमियों को दूर कर दोबारा आवेदन कर सकते हैं।
सुधार के लिए क्या करें? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)
- यदि आपकी वक्फ संपत्ति का आवेदन भी रिजेक्ट हुआ है, तो इन चरणों का पालन करें:
- स्टेटस चेक करें: अपने लॉगिन आईडी के जरिए 'उम्मीद पोर्टल' पर जाकर आवेदन की वर्तमान स्थिति देखें।
- सुधार विकल्प (Correction): पोर्टल पर सुधार का विकल्प उपलब्ध है। वहां जाकर देखें कि किस दस्तावेज या जानकारी पर आपत्ति जताई गई है।
- दस्तावेज अपलोड: आवश्यक सही दस्तावेज और विवरण अपडेट करें।
- पुनः सबमिशन: सुधार के बाद फॉर्म को फिर से सबमिट करें। इसके बाद वक्फ अधिकारी दोबारा जांच कर उसे स्वीकृति देंगे।
6 जून 2026: आखिरी मौका
उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने पंजीकरण और संशोधन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 6 जून 2026 कर दी है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अंतिम तिथि का इंतजार न करें, क्योंकि जांच प्रक्रिया में समय लगता है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो संपत्ति का रिकॉर्ड डिजिटल पोर्टल पर अधूरा रह जाएगा।
प्रदेश में वक्फ का गणित:
उत्तर प्रदेश में सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास करीब 1.30 लाख और शिया बोर्ड के पास 7 हजार संपत्तियां दर्ज हैं। पोर्टल पर सही पंजीकरण ही भविष्य में इन संपत्तियों के कानूनी अस्तित्व को मजबूती देगा।
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