राम मंदिर दान चोरी मामला: एसआईटी रिपोर्ट में पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा पर गंभीर आरोप
अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में गंभीर चूक उजागर, पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा जांच के घेरे में।
लखनऊ : अयोध्या में राम मंदिर के दान प्रबंधन में कथित वित्तीय अनियमितताओं और गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की 9 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट ने सनसनी मचा दी है। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को गंभीर प्रशासनिक और पर्यवेक्षी (सुपरवाइजरी) चूकों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है।
रिपोर्ट के अनुसार, चेतावनी मिलने के बावजूद सुरक्षा प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करने में लापरवाही बरती गई। जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा सीसीटीवी (CCTV) फुटेज से हुआ है। 27 अप्रैल से 6 जून के बीच केवल 45 दिनों के उपलब्ध फुटेज की समीक्षा में कम से कम 70 बार चोरी की घटनाएं सामने आई हैं।जेब कतरे की तरह नोट छिपाते दिखे कर्मचारी;
एसआईटी रिपोर्ट के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में नोटों की गिनती करने वाले कर्मचारी नोटों के बंडल और खुले कैश को अपने कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाते हुए साफ दिखाई दे रहे हैं। कुछ मामलों में साथी कर्मचारी उन्हें कैमरे के सामने खड़े होकर कवर देते हुए भी पाए गए हैं।"नियमों के तहत सीसीटीवी फुटेज को 180 दिनों तक सुरक्षित रखा जाना था, लेकिन इसे केवल 45 दिनों में ही ऑटो-ओवरराइट (डिलीट) होने दिया गया। यदि पुराना फुटेज उपलब्ध होता, तो चोरी का आंकड़ा बहुत बड़ा हो सकता था।"
एसआईटी रिपोर्ट अंशजांच एजेंसी ने पाया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और ट्रस्ट के बीच तय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की धज्जियां उड़ाई गईं। गिनती कक्ष में आने-जाने वालों की कोई मेटल डिटेक्टर या शारीरिक तलाशी (फ्रीस्किंग) नहीं की जा रही थी।'नौकरी के बदले कमीशन' के नए एंगल से बढ़ीं मुश्किलेंइस बीच, पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
जांच में सामने आया है कि मंदिर परिसर में लगभग 125 कर्मचारियों की नियुक्तियां अनिल मिश्रा की सिफारिश पर हुई थीं, जिनमें से कई उनके करीबी रिश्तेदार हैं। एसआईटी अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इन नियुक्तियों के बदले कोई वित्तीय कमीशन लिया गया था। मामले के तूल पकड़ने और राजनीतिक विवाद बढ़ने के बाद महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा पहले ही अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। पुलिस अब तक इस मामले में 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और उनके पास से लगभग 80 लाख रुपये की नकदी बरामद की जा चुकी है।
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