दिलजीत की फिल्म 'सतलुज' बैन होने पर अनुराग कश्यप बोले: 'अब तो जरूर देखूंगा'
अनुराग कश्यप ने दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को जी5 से अचानक हटाए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'प्रतिबंध का उलटा असर' बताया।
मुंबई, महाराष्ट्र: मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित और दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलुज' (पूर्व नाम 'पंजाब 95') को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 (ZEE5) से अचानक हटाए जाने के बाद बॉलीवुड में आक्रोश और बहस का माहौल है। इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दिग्गज फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने सोशल मीडिया पर 'स्ट्रैसैंड इफेक्ट' (किसी चीज को छिपाने की कोशिश में उसे और प्रसिद्ध कर देना) की ओर इशारा करते हुए कहा कि किसी भी चीज पर प्रतिबंध लगाने से लोगों में उसे देखने की उत्सुकता और अधिक बढ़ जाती है।
यह विवाद तब गहराया जब तीन साल तक सेंसर बोर्ड (CBFC) के साथ 127 कट्स की कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद, फिल्म को बिना किसी आधिकारिक सूचना के स्ट्रीमिंग के महज दो दिन के भीतर ही प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। 'जो चीज रोकी जाती है, उसे देखने की उत्सुकता दोगुनी हो जाती है'अनुराग कश्यप ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर फिल्म का समर्थन करते हुए लिखा कि प्रतिबंध हमेशा उल्टे नतीजे देता है। उन्होंने लिखा कि मानवीय स्वभाव ऐसा है कि जिस काम को करने से रोका जाए, लोग वही पहले करते हैं।
"प्रतिबंध लगाने की सबसे खास बात यह है कि आप किसी चीज़ पर जितना अधिक प्रतिबंध लगाते हैं, लोग उसे उतना ही अधिक देखना चाहते हैं। मेरा इस फिल्म को देखने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन अब मुझे यह समझने के लिए इसे देखना ही होगा कि आखिर इस पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया।" - अनुराग कश्यप, फिल्म निर्माताराम गोपाल वर्मा ने बताया 'गहरा घाव', ऐप डाउनलोड में 374% का उछालकश्यप के अलावा मशहूर निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर फिल्म की जमकर तारीफ की।
उन्होंने इसे सिनेमा का बेहतरीन और साहसी रूप बताते हुए कहा कि यह फिल्म हमारे इतिहास के एक काले अध्याय को बिना किसी दिखावे के सामने लाती है। उन्होंने दिलजीत दोसांझ के अभिनय की भी सराहना की। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे विवाद का एक अप्रत्याशित नतीजा यह निकला है कि भारत में फिल्म हटने के बाद वैश्विक स्तर पर जी5 (ZEE5) ऐप के डाउनलोड में 374 प्रतिशत का भारी उछाल देखा गया है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय दर्शक और अप्रवासी भारतीय इस प्रतिबंधित कंटेंट को देखने के लिए उत्सुक हैं।
फिल्म 'सतलुज' 1990 के दशक में पंजाब में हुए कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और अवैध रूप से शवों को जलाए जाने की संवेदनशील जांच पर आधारित है, जिसे सुरक्षा कारणों का हवाला देकर रोका गया है।
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