प्रयागराज में 'शक्ति' की चौपाल: महिला आयोग ने सुनी 50 पीड़ितों की गुहार, पुलिस और प्रशासन को समय सीमा में समाधान के सख्त निर्देश
उ.प्र. राज्य महिला आयोग की सदस्य गीता विश्वकर्मा ने प्रयागराज में जनसुनवाई कर महिलाओं की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए।
प्रयागराज। महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य गीता विश्वकर्मा ने बुधवार को स्थानीय सर्किट हाउस में एक महत्वपूर्ण जनसुनवाई का आयोजन किया। इस 'शक्ति चौपाल' में जिले भर से आई लगभग 50 पीड़ित महिलाओं ने घरेलू हिंसा, अवैध भूमि कब्जे, पुलिस उत्पीड़न और साइबर अपराध जैसे गंभीर मुद्दों पर अपनी आपबीती सुनाई।
जनसुनवाई के दौरान आयोग की सदस्य ने पुलिस विभाग के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि छोटे विवादों को थाने के स्तर पर ही संवेदनशीलता से निपटाया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पुलिस अपनी जिम्मेदारी सही से निभाए, तो पीड़ित महिलाओं को दर-दर भटकने और वर्षों तक अदालतों के चक्कर काटने की नौबत नहीं आएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि जनसुनवाई में आने वाले मामलों की मॉनिटरिंग सीधे आयोग स्तर से होती है, अतः किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रमुख मामलों पर आयोग के त्वरित निर्देश
जनसुनवाई में कई गंभीर मामले सामने आए, जिन पर मौके पर ही निर्देश जारी किए गए:
दहेज उत्पीड़न: चाका गोसाई (नैनी) निवासी शर्मिला की शिकायत पर, जिसमें उन्होंने ससुराल वालों पर जानलेवा हमले का आरोप लगाया था, आयोग ने दोनों पक्षों को 19 मार्च को लखनऊ मुख्यालय में तलब किया है।
भूमि अतिक्रमण: बालूमंडी की कल्लो देवी द्वारा जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत पर संबंधित थाने से तत्काल कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई है।
प्रताड़ना और रिपोर्ट: शिवकुटी और करेली की पीड़ितों की शिकायतों पर थानाध्यक्षों को एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है।
किराया विवाद: पुराना कटरा की राखी जायसवाल के दुकान खाली कराने संबंधी प्रकरण पर पुलिस आयुक्त और जिलाधिकारी को आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया है।
बैठक के दूसरे चरण में गीता विश्वकर्मा ने विभिन्न विभागों द्वारा संचालित महिला कल्याण योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट जांची। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सरकारी योजनाओं और सहायता राशि का लाभ पात्र महिलाओं तक बिना किसी देरी के पहुँचना चाहिए।
जनसुनवाई से पूर्व, सदस्य ने जिला कारागार (महिला बंदी गृह) का औचक निरीक्षण भी किया। उन्होंने वहां की साफ-सफाई, भोजन की गुणवत्ता और महिला कैदियों को दी जा रही विधिक सहायता का जायजा लिया और जेल प्रशासन को आवश्यक सुधार के निर्देश दिए।
इस अवसर पर अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम दिग्विजय सिंह सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। आयोग की इस सक्रियता से उन महिलाओं में न्याय की उम्मीद जागी है जो लंबे समय से व्यवस्था की सुस्ती का शिकार थीं।
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