"शंकराचार्य के शिष्यों को घसीटना सनातन परंपरा का अपमान"

सांसद उज्जवल रमण सिंह ने माघ मेले में शंकराचार्य के साथ हुए दुर्व्यवहार की निंदा करते हुए केंद्र से जांच की मांग की।

Jan 18, 2026 - 21:26
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"शंकराचार्य के शिष्यों को घसीटना सनातन परंपरा का अपमान"

प्रयागराज। माघ मेले के पावन अवसर पर मौनी अमावस्या के दिन ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके सहयोगियों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। प्रयागराज के सांसद उज्जवल रमण सिंह ने इस घटना को संगम की पावन भूमि के इतिहास में एक काला अध्याय करार दिया है।

सांसद प्रतिनिधि विनय कुशवाहा द्वारा जारी बयान में सांसद उज्जवल रमण सिंह ने गहरा दुःख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सदियों से चले आ रहे माघ मेले और कुंभ की परंपरा में यह पहली बार है जब किसी महान संत को शाही स्नान से रोका गया और उनके सहयोगियों के साथ हिंसक व्यवहार किया गया।

सांसद ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह अत्यंत आश्चर्यजनक और निंदनीय है कि जिस प्रदेश के मुख्यमंत्री स्वयं एक प्रतिष्ठित मठ के महंत हों, उन्हीं के शासनकाल में संन्यासियों के केश पकड़कर उन्हें घसीटा गया। उन्होंने इस घटना को संतों की गरिमा के विरुद्ध बताया।

सांसद उज्जवल रमण सिंह ने केंद्र सरकार से इस पूरी घटना की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जिन अधिकारियों या पुलिसकर्मियों ने संतों के साथ अमर्यादित व्यवहार किया है, उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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