उन्नत और रोगमुक्त फसलों के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय करेगा ₹98 लाख का शोध
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग को फसलों को रोगमुक्त बनाने के शोध हेतु 98 लाख रुपये का बड़ा अनुदान मिला।
प्रयागराज। कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने और किसानों को फसल बर्बादी से बचाने के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग को नेशनल रिसर्च एजेंसी की ओर से 98 लाख रुपये का 'एडवांस्ड रिसर्च ग्रांट' प्रदान किया गया है। इस बजट से वैज्ञानिक ऐसी फसलों पर शोध करेंगे जो जीवाणु जनित बीमारियों से मुक्त होंगी।
यह महत्वपूर्ण शोध डॉ. रिक्की राय की अगुवाई में संचालित होगा। इस टीम में डॉ. सुनील कुमार सिंह और हैदराबाद के डीएनए फिंगरप्रिंटिंग केंद्र के डॉ. सुभदीप चटर्जी सह-अन्वेषक के रूप में शामिल हैं। अगले पाँच वर्षों तक चलने वाले इस प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य रोगजनक जीवाणुओं के संक्रमण के कारणों का पता लगाकर उनका स्थाई समाधान खोजना है।
शोध के दौरान अत्याधुनिक जीनोमिक और बायोटेक्नोलॉजी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। वैज्ञानिक उन प्रमुख आनुवंशिक कारकों की पहचान करेंगे जो फसल की प्रतिरोधक क्षमता को निर्धारित करते हैं। डॉ. रिक्की राय ने बताया कि इस परियोजना का अंतिम उद्देश्य रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता को कम करना और ऐसी मजबूत फसलें विकसित करना है, जिससे किसानों को होने वाली आर्थिक क्षति को रोका जा सके।
फसलों में लगने वाली बीमारियों के कारण देश में हर साल करोड़ों का नुकसान होता है, जिसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ता है। इस शोध के निष्कर्षों से न केवल रोग-प्रतिरोधी किस्मों का विकास होगा, बल्कि टिकाऊ और सतत कृषि को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
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