रोबोटिक सर्जरी से बुजुर्गों के कदमों में लौटी रफ़्तार, 'बैक टू लाइफ' इवेंट में साझा की सफलता की कहानियां
लखनऊ मेदांता में 'बैक टू लाइफ' कार्यक्रम: जानें कैसे रोबोटिक सर्जरी ने 80 पार के बुजुर्गों को फिर से चलना सिखाया।
लखनऊ : आज के आधुनिक युग में चिकित्सा तकनीक ने असंभव को भी संभव कर दिखाया है। इसका जीवंत उदाहरण लखनऊ स्थित मेदांता हॉस्पिटल में आयोजित 'बैक टू लाइफ' जागरूकता कार्यक्रम में देखने को मिला। इस कार्यक्रम में उन मरीजों ने हिस्सा लिया, जिन्होंने रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के माध्यम से न केवल घुटनों के दर्द से मुक्ति पाई, बल्कि एक सक्रिय और आत्मनिर्भर जीवन की नई शुरुआत की।
80 की उम्र में फिर से कदमों की उड़ान
समारोह का मुख्य आकर्षण वे 80 से 85 वर्ष के बुजुर्ग रहे, जो सर्जरी के बाद बिना किसी सहारे के चलते नजर आए। मरीजों ने भावुक होते हुए बताया कि जो लोग कभी चलने-फिरने के लिए दूसरों पर निर्भर थे, वे आज खुद गाड़ी चला रहे हैं, साइकिल चला रहे हैं और रोजमर्रा के काम आसानी से कर पा रहे हैं।
रोबोटिक तकनीक: सटीकता और सुरक्षा का संगम
मेदांता के आर्थोपैडिक एवं रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के निदेशक डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि:
"रोबोटिक सर्जरी ऑस्टिओआर्थरइटिस से जूझ रहे मरीजों के लिए एक वरदान है। इसमें घुटने का एलाइनमेंट इतना सटीक होता है कि मरीज को प्राकृतिक अनुभव मिलता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित है और रिकवरी बहुत तेज होती है।"
- प्रतिभागी: 200 से अधिक मरीज, परिजन और चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हुए।
- अनुभव साझा: मरीजों ने 'मीट एंड ग्रीट' सत्र में अपनी रिकवरी यात्रा बताई।
उद्देश्य: समाज में जॉइंट रिप्लेसमेंट को लेकर फैले डर को दूर करना और नई तकनीक के प्रति विश्वास जगाना।
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