भारत-प्रशांत क्षेत्र में कूटनीतिक कमान: विदेश राज्य मंत्री का तीन द्वीपीय देशों का दौरा संपन्न

भारत के विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा ने समोआ, कुक द्वीप समूह और नाउरू का सफल दौरा कर भारत-प्रशांत क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों और कूटनीतिक सहयोग को नई ऊंचाइयां दी हैं।

Oct 22, 2026 - 21:39
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भारत-प्रशांत क्षेत्र में कूटनीतिक कमान: विदेश राज्य मंत्री का तीन द्वीपीय देशों का दौरा संपन्न

नई दिल्ली। भारत की दूरदर्शी 'एक्ट ईस्ट' नीति और ग्लोबल साउथ के देशों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को एक बार फिर वैश्विक स्तर पर नया आयाम मिला है। विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा का समोआ, कुक द्वीप समूह और नाउरू गणराज्य का सात दिवसीय रणनीतिक दौरा हाल ही में सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। 16 से 22 अक्टूबर तक चले इस महत्वपूर्ण दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और प्रशांत महासागरीय द्वीप राष्ट्रों के बीच आपसी साझेदारी को मजबूत करना और कूटनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना था।

अपनी इस कूटनीतिक यात्रा की शुरुआत समोआ की राजधानी अपिया से करते हुए, राज्य मंत्री ने इन तीनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय बैठकें कीं। इन वार्ताओं के दौरान व्यापार, निवेश, पर्यटन, जलवायु परिवर्तन के खतरे से निपटने और क्षमता निर्माण जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेष रूप से, भारत-प्रशांत द्वीप समूह सहयोग मंच (फिपिक) के उद्देश्यों को आगे बढ़ाते हुए आपसी रणनीतिक जुड़ाव को भविष्य की जरूरतों के अनुकूल ढालने पर विशेष जोर दिया गया।

कूटनीतिक बैठकों से इतर, श्री मार्गेरिटा ने भारत सरकार के सहयोग से इन सुदूर क्षेत्रों में चल रही विभिन्न विकासात्मक और सामाजिक परियोजनाओं का जमीनी स्तर पर निरीक्षण किया। उन्होंने स्थानीय समुदायों और भारतीय डायस्पोरा के साथ गर्मजोशी से संवाद किया। इसके अलावा, भारत के प्रतिष्ठित कार्यक्रमों जैसे आईटीईसी (ITEC) और आईसीसीआर (ICCR) के पूर्व छात्रों से मुलाकात कर उन्होंने भारत और इन द्वीपीय देशों के बीच मजबूत होते मानवीय रिश्तों और कौशल विकास की सराहना की। सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने इस साझेदारी को दोनों पक्षों के लिए अत्यंत लाभकारी बताया।

यह दौरा केवल एक कूटनीतिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह प्रशांत क्षेत्र के विकासशील देशों के साथ भारत की गहरी एकजुटता और उनकी विकास संबंधी आकांक्षाओं को वैश्विक मंच पर मुखरता से उठाने की दीर्घकालिक विदेश नीति का एक मजबूत प्रमाण है।

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