वीटो राजनीतिक स्वार्थ नहीं, गंभीर जिम्मेदारी है': संयुक्त राष्ट्र में भारत का पी5 देशों पर कड़ा प्रहार, व्यापक सुधारों की मांग

संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत पी. हरीश ने सुरक्षा परिषद में वीटो के दुरुपयोग पर पी5 देशों को घेरते हुए व्यापक वैश्विक सुधारों और ग्लोबल साउथ के प्रतिनिधित्व की मांग की।

Oct 27, 2026 - 20:24
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वीटो राजनीतिक स्वार्थ नहीं, गंभीर जिम्मेदारी है': संयुक्त राष्ट्र में भारत का पी5 देशों पर कड़ा प्रहार, व्यापक सुधारों की मांग

न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच से भारत ने एक बार फिर वैश्विक सुरक्षा ढांचे में सुधार के लिए अपनी आवाज बुलंद की है। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में यूएनजीए (UNGA) की पूर्ण बैठक के दौरान भारत ने सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों (P5) के रुख पर कड़ा प्रहार किया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने दोटूक शब्दों में कहा कि वीटो पावर का इस्तेमाल संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों को साधने का साधन नहीं, बल्कि एक अत्यंत गंभीर अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी है।

राजदूत पी. हरीश ने 'एक्स' पर साझा किए गए अपने संबोधन में पी5 देशों के दोहरे रवैये को उजागर किया। उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े तीन दशकों से अधिक समय में दो स्थायी सदस्यों ने एक बार भी वीटो का उपयोग नहीं किया है, जबकि वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े फैसलों में अड़ंगा लगाने या धमकियां देने का काम बाकी के तीन देशों द्वारा ही किया जाता रहा है। इसके अलावा, प्रतिबंध समितियों में आम सहमति के अलिखित नियमों को 'छिपे हुए वीटो' (Hidden Veto) की तरह इस्तेमाल कर पारदर्शी फैसलों को बाधित किया जा रहा है।

भारतीय राजदूत ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा परिषद में 'टुकड़ों में किए गए सुधार' किसी काम के नहीं हैं। उन्होंने सदस्यता की श्रेणियों, वीटो अधिकार, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, परिषद के आकार और कार्यप्रणाली जैसे सभी पांचों प्रमुख पहलुओं पर एक साथ व्यापक सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।

भारत ने बिना वीटो अधिकार के नए सदस्यों को जोड़ने के सुझावों का कड़ा विरोध करते हुए इसे 'दूसरे दर्जे' की सदस्यता करार दिया, जो आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुकूल नहीं है। भारत, जी4 समूह (ब्राजील, जर्मनी, जापान) और अफ्रीकी देशों के साथ मिलकर एक ऐसी विस्तारित सुरक्षा परिषद की मांग कर रहा है, जहां 'ग्लोबल साउथ' और विकासशील देशों को पूर्ण व समान अधिकारों के साथ उचित स्थान मिले। अपनी मजबूत अर्थव्यवस्था, विशाल आबादी और यूएन शांति अभियानों में ऐतिहासिक योगदान के दम पर भारत स्थायी सदस्यता के लिए अपना दावा मजबूती से प्रस्तुत कर रहा है।

(शाश्वत तिवारी)

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