मानसून का रौद्र रूप: हिमाचल में 1168 करोड़ का नुकसान, 98 सड़कें ठप और 237 जिंदगियां खामोश
हिमाचल प्रदेश में मानसून ने भारी तबाही मचाई है। 98 सड़कें बंद होने, 1168 करोड़ के नुकसान और 237 मौतों के बीच प्रशासन अब बहाली कार्यों में जुट गया है।
शिमला : हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। यद्यपि मौसम विभाग ने आगामी दिनों में बारिश की रफ्तार धीमी पड़ने के संकेत दिए हैं, लेकिन बीते दिनों हुई मूसलाधार बारिश ने राज्य के बुनियादी ढांचे को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है। पहाड़ों पर बादल छटने के बावजूद आम जनजीवन पटरी पर नहीं लौट सका है और दूरदराज के इलाकों में बिजली, सड़क व पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं।
तबाही की तस्वीर: सड़कें बंद, बिजली-पानी गुल
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में वर्तमान में 98 प्रमुख सड़कें यातायात के लिए पूरी तरह बंद हैं। भूस्खलन और मलबे के कारण कई गांवों का संपर्क राज्य के अन्य हिस्सों से कट चुका है। इसके अतिरिक्त:
बिजली आपूर्ति: 5 प्रमुख क्षेत्रों में ट्रांसफॉर्मर ठप होने से बिजली गुल है।
पेजल संकट: 20 से अधिक स्थानों पर मुख्य जलापूर्ति लाइनें क्षतिग्रस्त होने से पीने के पानी का भारी संकट खड़ा हो गया है।
सड़क बहाली: पीडब्ल्यूडी (PWD) की टीमें जेसीबी मशीनों के साथ 98 अवरुद्ध सड़कों को खोलने के प्रयास में जुटी हुई हैं।
1168 करोड़ की संपत्ति स्वाहा, 237 की मौत
30 जून से शुरू हुए इस मानसून सीजन में प्रदेश को अब तक 1,168 करोड़ रुपये से अधिक का सीधा आर्थिक नुकसान हो चुका है। पुलों का बहना, सड़कों का धंसना और सरकारी इमारतों का क्षतिग्रस्त होना इस बात का प्रमाण है कि बारिश ने सरकारी खजाने पर गहरी मार मारी है।
आर्थिक नुकसान से भी दर्दनाक मानवीय क्षति का आंकड़ा है। इस सीजन में कुल 237 लोगों ने अपनी जान गंवाई है:
प्राकृतिक आपदा (भूस्खलन/बाढ़): 98 मौतें
सड़क दुर्घटनाएं (खराब मौसम के कारण): 139 मौतें
मौसम में सुधार के संकेतों के बीच अब राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की पहली प्राथमिकता ठप पड़ी सड़कों, बिजली और पेयजल व्यवस्था को जल्द से जल्द बहाल करना है, ताकि प्रभावित लोगों को राहत मिल सके।
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