भारत-कनाडा ऐतिहासिक प्रवासन संवाद: छात्रों और कुशल पेशेवरों के लिए आसान होंगे राह के कांटे, सुरक्षा पर विशेष बल
भारत और कनाडा के बीच नई दिल्ली में आयोजित ऐतिहासिक प्रवासन संवाद में छात्रों, कामगारों और प्रवासियों की सुरक्षा तथा सुगम वीजा प्रक्रियाओं पर महत्वपूर्ण 'कार्य-शर्तों' (ToR) पर हस्ताक्षर किए गए।
नई दिल्ली: भारत और कनाडा के कूटनीतिक संबंधों में एक नया और सकारात्मक अध्याय जुड़ गया है। नई दिल्ली में आयोजित प्रथम 'भारत-कनाडा प्रवासन और गतिशीलता संवाद' (Migration and Mobility Dialogue) में दोनों देशों ने प्रवासियों के अधिकारों, सुरक्षा और आवाजाही को सुव्यवस्थित करने के लिए ऐतिहासिक 'कार्य-शर्तों' (Terms of Reference) पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए।
इस उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक की सह-अध्यक्षता भारतीय विदेश मंत्रालय की सचिव (सीपीवी एवं ओआईए) श्रीप्रिया रंगनाथन और कनाडा के आव्रजन, शरणार्थी और नागरिकता विभाग के उप मंत्री टेड गैलिवन ने की। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य कानूनी, पारदर्शी और सुरक्षित प्रवासन ढांचे का निर्माण करना है, जिससे दोनों देशों के बीच प्रतिभाओं का सुगम आदान-प्रदान हो सके।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस बैठक का जोर आवागमन के नए और सरल रास्ते बनाने पर रहा। यह रणनीतिक कदम भविष्य में भारत-कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊर्जा और मजबूती प्रदान करेगा। इस संवाद का सबसे सीधा और बड़ा फायदा कनाडा जाने की इच्छा रखने वाले भारतीय छात्रों, डॉक्टरों, इंजीनियरों और अन्य कुशल कामगारों को मिलेगा।
सुव्यवस्थित नियमों से वीजा आवेदन, वर्क परमिट और स्थायी निवास (PR) से जुड़ी जटिलताएं दूर होंगी। इसके अलावा, कनाडा में पहले से रह रहे विशाल भारतीय समुदाय की सुरक्षा और उनके हितों का बेहतर संरक्षण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
वार्ता के दौरान विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि भारतीय युवा प्रतिभाएं और कनाडा की श्रम बाजार संबंधी जरूरतें एक-दूसरे की पूरक हैं। दोनों देशों ने माना कि जन-सांख्यिकीय तालमेल और 'पीपुल-टू-पीपुल' संबंध ही इस साझेदारी का सबसे मजबूत स्तंभ हैं। यह संवाद अब हर साल आयोजित किया जाएगा, जिसके लिए 'प्रवासन एवं गतिशीलता पर संयुक्त कार्य समूह' निरंतर सहयोग प्रदान करेगा।
(शाश्वत तिवारी)
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