समय पर मिला इलाज, तो टल जाएगा लकवे का खतरा: पारस अस्पताल ने शुरू किया विशेष अभियान

कानपुर के पारस अस्पताल ने विश्व स्ट्रोक दिवस पर 23 से 28 अक्टूबर तक जागरूकता शिविर की शुरुआत की। स्ट्रोक के लक्षणों की पहचान और समय पर इलाज से जान बच सकती है। #BrainStroke #ParasHospitalKanpur #StrokeAwareness #WorldStrokeDay #EveryMinuteCounts #HealthNewsHindi #BrainStrokeSymptoms #ActFast #SpotStroke #KanpurHealth #StrokePrevention #MedicalNews

Oct 24, 2026 - 19:08
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समय पर मिला इलाज, तो टल जाएगा लकवे का खतरा: पारस अस्पताल ने शुरू किया विशेष अभियान

कानपुर : ब्रेन स्ट्रोक (मस्तिष्काघात) एक ऐसी गंभीर चिकित्सीय आपातस्थिति है, जिसमें हर बीता हुआ सेकंड मरीज की जिंदगी और उसकी कार्यक्षमता के लिए बेहद कीमती होता है। सही समय पर लक्षणों की पहचान और तुरंत उपचार न केवल मरीज की जान बचा सकता है, बल्कि उसे जीवनभर की दिव्यांगता से भी सुरक्षित रख सकता है।

इसी महत्वपूर्ण संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए विश्व स्ट्रोक दिवस (29 अक्टूबर) के अवसर पर पारस अस्पताल, कानपुर द्वारा एक विशेष जनजागरूकता अभियान की शुरुआत की गई है। न्यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार के मार्गदर्शन में 23 से 28 अक्टूबर 2026 तक नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर, जागरूकता कार्यक्रम और मेडिकल स्टाफ के लिए विशेष सर्टिफिकेशन ट्रेनिंग का आयोजन किया जा रहा है।

वर्ल्ड स्ट्रोक ऑर्गेनाइजेशन के "एव्री मिनट काउंट्स" (Every Minute Counts), ActFast और SpotStroke जैसे अभियानों के तहत लोगों को स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों के प्रति सतर्क किया जा रहा है।

डॉ. प्रदीप कुमार के अनुसार, स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग तक खून की सप्लाई रुक जाती है या दिमागी नस फट जाती है। यदि लक्षण दिखने के साढ़े चार घंटे (Golden Hour) के भीतर मरीज को स्ट्रोक-रेडी अस्पताल पहुँचा दिया जाए, तो जांच के बाद थक्का घोलने वाला इंजेक्शन (क्लॉट बस्टर) देकर मरीज को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

इन मुख्य लक्षणों पर रखें नजर:

  • चेहरा (Face): चेहरे का अचानक एक तरफ झुकना বা टेढ़ा होना।
  • हाथ-पैर (Arm/Leg): एक तरफ के हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन।
  • बोली (Speech): बोलने में लखड़ापन या बात समझने में परेशानी।

विशेषज्ञों की सलाह है कि लक्षण दिखते ही समय नोट करें और घरेलू नुस्खों में वक्त गंवाए बिना तुरंत नजदीकी न्यूरो-इमरजेंसी अस्पताल पहुँचें।

(संजय शुक्ला)

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