'हिंदी अब केवल भारत की नहीं, विश्व के विश्वास की भाषा है'—स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज में विश्व हिंदी दिवस की धूम

कानपुर के स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज में विश्व हिंदी दिवस पर शोध छात्रों ने हिंदी को 'विश्व के विश्वास की भाषा' बताया।

Jan 10, 2026 - 20:42
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'हिंदी अब केवल भारत की नहीं, विश्व के विश्वास की भाषा है'—स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज में विश्व हिंदी दिवस की धूम

कानपुर। 'स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज' में शोधार्थी छात्र-छात्राओं द्वारा विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर एक प्रेरणादायक और बौद्धिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस गौरवशाली अवसर पर “हिंदी भाषा का वैश्विक परिप्रेक्ष्य और समकालीन चुनौतियाँ” विषय पर गंभीर विमर्श हुआ, जिसमें हिंदी की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता और इसकी भविष्य की राह पर प्रकाश डाला गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संस्थान के निदेशक डॉ. सर्वेश मणि त्रिपाठी ने अपने संबोधन में शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि हिंदी को सशक्त बनाने के लिए हमें उसकी भाषिक बारीकियों और भावात्मक गहराई को समझना होगा। उन्होंने गर्व के साथ रेखांकित किया कि हिंदी आज सीमाओं को लांघकर वैश्विक पटल पर 'विश्व के विश्वास की भाषा' के रूप में स्थापित हो चुकी है।

हिंदी विभाग के प्रभारी डॉ. श्रीप्रकाश ने हिंदी के सामाजिक और अकादमिक महत्व पर चर्चा की। उन्होंने शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी शोध दृष्टि को वैश्विक मंचों की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालें। कार्यक्रम में डॉ. लक्ष्मण और डॉ. सुमित कुमार चौधरी ने हिंदी की व्यावहारिक उपयोगिता पर विचार रखे। इस दौरान डॉ. प्रीतिवर्धन दुबे और डॉ. अंजनी कुमार उपाध्याय सहित अनेक वरिष्ठ शिक्षक भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी विभागों के शोधार्थियों की सहभागिता रही। शोध छात्र मयंक श्रीवास्तव के कुशल संचालन में छात्रों ने स्वरचित कविता पाठ और लघु व्याख्यानों के जरिए हिंदी की गरिमा को स्वर दिया। कार्यक्रम का समापन सभी उपस्थित जनों द्वारा हिंदी भाषा के संवर्धन और प्रचार-प्रसार के संकल्प के साथ हुआ। यह आयोजन न केवल एक उत्सव था, बल्कि हिंदी के प्रति समर्पण और बौद्धिक ऊर्जा का संगम भी रहा।

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