Birla IVF : फर्टिलिटी क्लीनिक जाने से पहले जान लें AMH, IVF और IUI जैसे जरूरी शब्दों का मतलब

पहली फर्टिलिटी काउंसिलिंग से पहले AMH, IVF और IUI जैसे जरूरी शब्दों का सही मतलब और महत्व आसान भाषा में समझें।

Jul 07, 2026 - 22:35
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Birla IVF : फर्टिलिटी क्लीनिक जाने से पहले जान लें AMH, IVF और IUI जैसे जरूरी शब्दों का मतलब

वाराणसी : पहला फर्टिलिटी परामर्श कई दंपतियों के लिए थोड़ा उलझन भरा हो सकता है। वजह यह नहीं होती कि हर बात बहुत कठिन है, बल्कि यह कि कई शब्द पहली बार सुनने को मिलते हैं। एएमएच, एफएसएच, डीएफआई, आईयूआई और आईवीएफ जैसे शब्द बातचीत में जल्दी आ जाते हैं, कई बार उससे पहले कि दंपति समझ पाएं कि इनका मतलब क्या है।

डॉ. दीपिका मिश्रा, फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, वाराणसी का कहना है कि इन शब्दों को समझना डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं लेता। लेकिन इससे पहला परामर्श समझना आसान हो जाता है, दंपति बेहतर सवाल पूछ पाते हैं और रिपोर्ट या उपचार से जुड़ी बातों को सही संदर्भ में समझ पाते हैं।

एएमएच, यानी एंटी-म्यूलरियन हार्मोन, अंडाशय की क्षमता का संकेत देता है। आसान भाषा में कहें तो इससे डॉक्टर को यह समझने में मदद मिलती है कि अंडाशय में अंडों की संख्या का स्तर कैसा है। एएमएच कम होना ध्यान देने वाली बात हो सकती है, लेकिन इसे अकेले पढ़कर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। उम्र, अल्ट्रासाउंड, पीरियड्स का इतिहास, पहले हुए उपचार और साथी की सीमेन रिपोर्ट, इन सभी को साथ देखकर ही सही समझ बनती है।

एफएसएच, यानी फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हार्मोन, यह समझने में मदद करता है कि अंडाशय हार्मोनल संकेतों पर कैसी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। एफएसएच अधिक होने पर कभी-कभी यह संकेत मिल सकता है कि अंडाशय को प्रतिक्रिया देने के लिए अधिक समर्थन की जरूरत हो सकती है। लेकिन एएमएच की तरह एफएसएच भी पूरी तस्वीर का केवल एक हिस्सा है।

डीएफआई, यानी डीएनए फ्रैगमेंटेशन इंडेक्स, स्पर्म के अंदर डीएनए की स्थिति को समझने वाली जांच है। सामान्य सीमेन जांच में स्पर्म काउंट, गति और आकार देखा जाता है, लेकिन डीएफआई कुछ चुने हुए मामलों में स्पर्म हेल्थ की गहरी जानकारी दे सकता है। यह हर दंपति के लिए पहली मुलाकात में जरूरी जांच नहीं होती। डॉक्टर इसे बार-बार आईवीएफ असफल होने, बार-बार प्रेग्नेंसी लॉस, अस्पष्ट कारण वाली इनफर्टिलिटी या पुरुष फर्टिलिटी से जुड़ी खास चिंता होने पर सलाह दे सकते हैं।

आईयूआई और आईवीएफ दोनों फर्टिलिटी उपचार हैं, लेकिन दोनों का तरीका अलग है। आईयूआई, यानी इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन, में तैयार किए गए स्पर्म को ओव्यूलेशन के समय गर्भाशय के अंदर रखा जाता है। इसे तब सलाह दी जा सकती है जब फैलोपियन ट्यूब खुली हों, ओव्यूलेशन सामान्य हो या दवाइयों से सहारा दिया जा सके, और स्पर्म रिपोर्ट उपचार के लिए उपयुक्त हो।

आईवीएफ, यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन, में अंडे और स्पर्म का फर्टिलाइजेशन लैब में कराया जाता है। इसके बाद बने हुए एम्ब्रियो को गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है। आईवीएफ की सलाह ब्लॉक ट्यूब, कम ओवेरियन रिजर्व, गंभीर पुरुष फर्टिलिटी समस्या, अधिक उम्र, एंडोमेट्रियोसिस, बार-बार आईयूआई असफल होने या अन्य मेडिकल कारणों में दी जा सकती है।

कौन सा उपचार सही रहेगा, यह किसी एक रिपोर्ट या एक शब्द से तय नहीं होता। यह दंपति की उम्र, प्रेग्नेंसी की कोशिश का समय, अंडाशय की क्षमता, सीमेन रिपोर्ट, मेडिकल इतिहास और पहले हुए उपचार के परिणामों को देखकर तय किया जाता है।

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