BHEL हरिद्वार में 'विज़न ज़ीरो' कार्यशाला: कार्यस्थल सुरक्षा के लिए इंडो-जर्मन सहयोग की नई पहल
बीएचईएल हरिद्वार में 'विज़न ज़ीरो' कार्यशाला का आयोजन, कार्यस्थलों को दुर्घटना-मुक्त बनाने के लिए सात स्वर्णिम नियमों पर हुआ मंथन।
हरिद्वार/कानपुर। औद्योगिक सुरक्षा और श्रमिकों के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए बीएचईएल (BHEL) हरिद्वार में 'विज़न ज़ीरो' (Vision Zero) प्रणाली पर आधारित एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम इंडो-जर्मन कोऑपरेशन फॉर सेफ्टी, हेल्थ एंड वेलबीइंग (IGC-SHW), नोएडा द्वारा डीजीयूवी जर्मनी और अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संघ (ISSA) के तकनीकी सहयोग से संपन्न हुआ।
दुर्घटना-मुक्त कार्यस्थल का संकल्प
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य उद्योगों को व्यावहारिक और आसान तरीकों से दुर्घटना-मुक्त बनाना है। बीएचईएल के दोनों प्रमुख संयंत्रों (एचईईपी एवं सीएफएफपी) के साथ-साथ रानीपुर औद्योगिक क्षेत्र के विभिन्न उद्योगों से आए 50 से अधिक प्रतिनिधियों ने इसमें हिस्सा लिया। सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा केवल एक नियम नहीं, बल्कि एक संस्कृति होनी चाहिए।
सुरक्षा के सात 'स्वर्णिम नियम'
उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. अवनीश सिंह (पूर्व महानिदेशक, डीजी फासली) ने 'विज़न ज़ीरो' के ऐतिहासिक विकास और इसके वैश्विक प्रभाव की जानकारी दी। वहीं, विशेषज्ञ करुणेश श्रीवास्तव ने विज़न ज़ीरो के सात स्वर्णिम नियमों (7 Golden Rules) की विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने बताया कि कैसे नेतृत्व, जोखिमों की पहचान और तकनीकी प्रशिक्षण के माध्यम से कार्यस्थल पर शून्य दुर्घटना का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
सामूहिक प्रयास की आवश्यकता
बीएचईएल के महाप्रबंधक जे.के. पुंडीर ने भी अपने विचार साझा करते हुए सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही सुरक्षित औद्योगिक वातावरण का निर्माण संभव है। इस अवसर पर सुरक्षा अधिकारी अनिल कुमार, सुधीर कुमार सिंह और अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिन्होंने आधुनिक सुरक्षा उपकरणों और व्यावहारिक सुधारों पर चर्चा की।
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