महिला हिंसा विरोधी पखवाड़े में गूंजा 'संविधान ज़िंदाबाद' का नारा
अंबेडकर नगर में 16 दिवसीय घरेलू महिला हिंसा विरोधी पखवाड़े के तहत संविधान दिवस मनाया गया, जिसमें डॉ. अंबेडकर को श्रद्धांजलि दी गई।
अम्बेडकर नगर :जन शिक्षण केंद्र (जेएसके) द्वारा आयोजित 16 दिवसीय घरेलू महिला हिंसा विरोधी पखवाड़े के तहत विकासखंड जलालपुर की ग्राम पंचायत भस्मा और अकबरपुर की ग्राम पंचायत बनवा में संविधान दिवस का गरिमामय आयोजन किया गया। इस अनूठे समागम की शुरुआत भारत के संविधान के जनक बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के चित्र पर माल्यार्पण कर की गई।
कार्यक्रम में सावित्री बाई फुले नारी संघ, वायस आफ पीपुल (वीओपी) और नारी शक्ति मोर्चा के अगुवा साथियों ने 'संविधान दिवस ज़िंदाबाद' के जोरदार नारों के साथ बाबा साहब को श्रद्धांजलि दी।
जन शिक्षण केंद्र की सचिव पुष्पा पाल ने अपने संबोधन में संविधान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "संविधान हमारे देश की वह सर्वोच्च किताब है, जिससे राष्ट्र संचालित होता है। यह भारत को संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करता है, और सभी नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता और समानता की गारंटी देता है।" उन्होंने संविधान के मुख्य वास्तुकार डॉ. अम्बेडकर के महान योगदान को याद करने और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
कार्यक्रम समन्वयक ने संविधान दिवस के इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि भारत गणराज्य का संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हुआ था। डॉ. अम्बेडकर की 125वीं जयंती वर्ष के रूप में, पहली बार 26 नवंबर 2015 को यह दिवस पूरे देश में मनाया गया और तब से यह हर वर्ष मनाया जा रहा है।
वीओपी के अगुवा लालता प्रसाद ने उपस्थित लोगों में जोश भरते हुए कहा कि हमें संविधान को जीना चाहिए। उन्होंने बाबा साहब के मूल मंत्र "शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो" का आह्वान किया और उनके प्रसिद्ध उद्धरण "शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो पिएगा वही दहाड़ेगा" को दोहराया।
गोष्ठी का समापन अगुवा बहनों द्वारा "संविधान ज़िंदाबाद" और "बाबा साहब अमर रहें" जैसे नारों के साथ किया गया। इसके अतिरिक्त, “मेरे भारत का संविधान सारी दुनिया से न्यारा है, सब पृष्ठों में समरसता है, शब्दों में भाईचारा है” गीत की प्रस्तुति ने समरसता और भाईचारे के संदेश को मुखर किया।
इस महत्वपूर्ण आयोजन में जयराम, लालता प्रसाद, हरिराम, जयराज गौतम, फूलचंद्र भारती, पुनीता, उर्मिला, सुनीता, गीता, चंद्रावती, किरन, आदि समेत कई अगुवा बहनें और साथी उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम घरेलू हिंसा के विरोध के संकल्प को संवैधानिक मूल्यों की जागरूकता से जोड़कर एक सशक्त संदेश देने में सफल रहा।
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