यूपी के 12 लाख कर्मचारियों की बढ़ी बेचैनी: केंद्र ने दिया 60% डीए, पर राज्य में फाइलें अब भी 'लापता'
यूपी के 12 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों का डीए (DA) बढ़ने का इंतजार लंबा हुआ, 2% बढ़ोतरी की फाइल अटकी।
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के सरकारी गलियारों में इन दिनों केवल एक ही चर्चा है—'महंगाई भत्ता' (DA)। केंद्र सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों के लिए डीए की दर को 58% से बढ़ाकर 60% करने के महीनों बाद भी, उत्तर प्रदेश के करीब 12 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की उम्मीदें अब भी अधर में लटकी हैं। पिछले चार महीनों से जारी इस इंतजार ने अब कर्मचारियों के सब्र का बांध तोड़ना शुरू कर दिया है।
उत्तर प्रदेश में लगभग 8 लाख नियमित सरकारी कर्मचारी और 4 लाख पेंशनर हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस और राजस्व जैसे महत्वपूर्ण विभागों के ये कर्मचारी इस उम्मीद में थे कि केंद्र की घोषणा के तत्काल बाद राज्य सरकार भी 2% की इस बढ़ोतरी को मंजूरी दे देगी। लेकिन हकीकत यह है कि जनवरी 2026 से लागू होने वाली यह वृद्धि अभी तक केवल फाइलों तक ही सीमित है।
उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण कर्मचारी संयुक्त संगठन के अध्यक्ष अवधेश प्रताप सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि महंगाई जिस रफ्तार से बढ़ रही है, उसमें डीए की यह मामूली बढ़ोतरी भी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत साबित होगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "केंद्र ने तीन महीने पहले ही अपना फैसला सुना दिया, लेकिन यूपी में चार महीने बीत जाने के बाद भी फाइलें सिर्फ टेबल-दर-टेबल घूम रही हैं। अगर जल्द ही शासनादेश जारी नहीं हुआ, तो हमें आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ेगा।"
यही सुर निकाय कर्मचारियों के दिग्गज नेता शशि प्रकाश मिश्र के भी हैं, जिनका मानना है कि चार महीने का समय किसी भी सरकार के लिए निर्णय लेने हेतु पर्याप्त होता है।
वित्त विभाग के सूत्रों की मानें तो डीए में 2% की वृद्धि से राज्य के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। हालांकि, अधिकारियों का यह भी मानना है कि कर्मचारियों की कार्यक्षमता और मनोबल बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य है। गौरतलब है कि आखिरी बार अक्टूबर 2025 में डीए में 3% की वृद्धि की गई थी, जिससे यह 58% के स्तर पर पहुंचा था।
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