कौशाम्बी में आरएसएस का भव्य पथ संचलन, गूंजा 'स्व' का उद्घोष

कौशाम्बी में आरएसएस का भव्य पथ संचलन। विभाग प्रचारक ओम प्रकाश ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को 'स्व' की पुनर्जागृति का प्रतीक बताया।

Mar 22, 2026 - 20:41
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कौशाम्बी में आरएसएस का भव्य पथ संचलन, गूंजा 'स्व' का उद्घोष

कौशाम्बी। भारतीय नव संवत्सर के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा मंझनपुर नगर में भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया। पूर्ण गणवेश में सजे सैकड़ों स्वयंसेवकों ने जब कदम से कदम मिलाकर नगर की सड़कों पर मार्च किया, तो पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति के नारों से गुंजायमान हो उठा।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, विभाग प्रचारक ओम प्रकाश ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए भारतीय काल-गणना की वैज्ञानिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "चैत्र शुक्ल प्रतिपदा केवल कैलेंडर की एक तिथि नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा का उत्सव है। इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि के सृजन का आरंभ किया था, जो इसे ब्रह्मांड की वास्तविक प्रथम तिथि बनाता है।"

ओम प्रकाश जी ने कड़े शब्दों में कहा कि 1 जनवरी को नववर्ष मनाना केवल एक औपनिवेशिक मानसिकता की निशानी है। उन्होंने जोर देकर कहा:

"भारतीय नववर्ष को अपनाना और उस पर गर्व करना 'स्व' की पुनर्जागृति का मार्ग है। विदेशी आक्रांताओं ने हमारी मानसिक स्वतंत्रता को खंडित करने का प्रयास किया, लेकिन चैत्र प्रतिपदा हमें अपनी सभ्यतागत पहचान की याद दिलाती है।"

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गौरव का संगम
संबोधन के दौरान इस तिथि के ऐतिहासिक महत्व को भी रेखांकित किया गया:

  • इसी दिन सम्राट विक्रमादित्य ने शकों पर विजय प्राप्त कर 'विक्रम संवत' शुरू किया।
  • छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का राज्याभिषेक भी इसी पावन तिथि को हुआ।
  • स्वामी दयानंद सरस्वती ने इसी दिन आर्य समाज की स्थापना कर भारत के पुनर्जागरण का बिगुल फूंका था।

अनुशासित संचलन में उमड़ा जनसैलाब
मंझनपुर की सड़कों पर हुए इस संचलन में जिला प्रचारक शिव प्रसाद, जिला संघचालक केदार, दिलीप, संजीव, श्री कृष्ण, अश्वनी, जितेन्द्र सोनकर और जगत यादव सहित सैकड़ों स्वयंसेवक शामिल हुए। नगरवासियों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर संचलन का स्वागत किया। अनुशासन और राष्ट्रवाद का यह दृश्य देख जनमानस में भारतीय नववर्ष के प्रति विशेष उत्साह देखा गया।

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