ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते: RPF ने गुमशुदा बालक को सुरक्षित चाइल्ड लाइन को सौंपा
प्रयागराज में आरपीएफ ने 'ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते' के तहत एक 12 वर्षीय गुमशुदा बालक को सुरक्षित चाइल्ड लाइन को सुपुर्द किया।

यह घटना 24 अगस्त 2025 को हुई, जब आरपीएफ के जवान प्लेटफॉर्म संख्या 1 से 6 के दिल्ली छोर पर अपनी नियमित गश्त पर थे। ड्यूटी पर तैनात कांस्टेबल मक्खन लाल और महिला कांस्टेबल निशा यादव ने पैदल पुल संख्या 4 पर एक नाबालिग बालक को संदिग्ध स्थिति में घूमते हुए देखा। उनकी सतर्कता और संवेदनशीलता के कारण, उन्होंने तुरंत बालक से पूछताछ करने का निर्णय लिया और उसे आरपीएफ पोस्ट प्रयागराज ले आए।
आरपीएफ पोस्ट पर हुई पूछताछ में बालक ने अपना नाम देवा बताया, जो राकेश कुमार का पुत्र है और जिसकी उम्र 12 वर्ष है। उसने यह भी बताया कि वह उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के बसेला गाँव का रहने वाला है। बच्चे की पहचान सुनिश्चित होने के बाद, आरपीएफ ने सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं।
इसके बाद, उपनिरीक्षक संजय कुमार तिवारी की देखरेख में बालक को चाइल्ड लाइन प्रयागराज की टीम को सौंप दिया गया। इस दौरान चाइल्ड लाइन की टीम से सुपरवाइजर ज्योति शुक्ला और केस वर्कर ज्योति सिंह मौजूद थीं। इस मानवीय कार्य में महिला कांस्टेबल सोनम यादव ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रेलवे सुरक्षा बल का 'ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते' केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक मानवीय पहल है जो समाज के सबसे कमजोर वर्ग, यानी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। यह घटना दर्शाती है कि आरपीएफ केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट में फंसे लोगों की मदद के लिए भी सदैव तत्पर रहती है।
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