प्रखर कवि विद्रोही गोंडा का 73वां जन्मदिन, उपलब्धियों पर विशेष चर्चा

गोंडा के प्रसिद्ध साहित्यकार कवि विद्रोही का 73वां जन्मदिन, दैनिक जागरण ने उनकी विशिष्ट साहित्यिक और शैक्षणिक उपलब्धियों को सराहा।

Jun 30, 2026 - 17:36
Updated: 2 hours ago
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प्रखर कवि विद्रोही गोंडा का 73वां जन्मदिन, उपलब्धियों पर विशेष चर्चा

गोंडा : मां वाग्देवी सरस्वती के अनन्य साधक और जनपद के प्रतिष्ठित साहित्यकार 'कवि विद्रोही गोंडा' (श्री शिवाकान्त मिश्र) ने अपना 73वां एकेडमिक जन्मदिवस मनाया। वास्तविक रूप से भाद्रपद कृष्ण पक्ष सप्तमी (स्वामी कार्तिकेय जयंती) को जन्मे कवि विद्रोही को यह नाम उनके ताऊ विद्वान पं0 अनन्तराम मिश्र ने दिया था। अपने नाम के अनुरूप ही वे आजीवन स्वाभिमानी, स्पष्टवादी और अपनी शर्तों पर जीने वाले रचनाकार रहे हैं।

काव्य मंचीय जीवन में शुरुआत से ही जबरदस्त लोकप्रियता बटोरने वाले विद्रोही जी न केवल साहित्य, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी अव्वल रहे। उन्होंने घर बैठे ही गणित जैसे कठिन विषय में 80% अंकों (विशेष योग्यता) के साथ प्रथम श्रेणी में अकादमिक सफर पूरा किया। उनकी इस विलक्षण प्रतिभा के कारण समकालीनों के बीच वे अक्सर ईर्ष्या का केंद्र भी रहे, जिसका जवाब उन्होंने हमेशा अपनी कविताओं और कर्म से दिया।

अपनी उपलब्धियों और जिले के सबसे प्रतिष्ठित समाचार पत्र 'दैनिक जागरण' द्वारा प्रकाशित विशेष परिचय पर आभार जताते हुए उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक का संदर्भ दिया:

"प्रकृते: क्रियमाणानि गुणै: कर्माणि सर्वश:। अहंकार विमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते॥"

कवि का मानना है कि सब कुछ प्रकृति के गुणों द्वारा ही संचालित होता है, मनुष्य तो केवल निमित्त है। उनकी कविता की ये पंक्तियाँ उनके निर्भीक व्यक्तित्व को बखूबी बयां करती हैं:
“समझा जीवन रणविजयों से, ली सबक हमेशा हारों से। अहसानों से दबकर चलना, डरता हूं बस उपकारों से।”

मंचों पर दशकों से अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले इस विद्रोही चेतना के कवि ने जीवन के उतार-चढ़ावों को सहजता से स्वीकारते हुए अपनी साहित्यिक यात्रा को निरंतर जारी रखा है।

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