मेदांता लखनऊ के पीआईसीयू में डॉक्टरों का कमाल: पूरे शरीर में फैले जानलेवा संक्रमण से 6 साल के बच्चे को मिला नया जीवन
मेदांता लखनऊ के पीआईसीयू में डॉक्टरों की मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम ने 6 साल के बच्चे का सफल इलाज कर उसे गंभीर स्टैफिलोकोकल संक्रमण और सेप्टिक शॉक से नया जीवन दिया।
लखनऊ : मेदांता अस्पताल लखनऊ के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) की विशेषज्ञ टीम ने एक बार फिर चिकित्सा के क्षेत्र में मिसाल पेश की है। डॉक्टरों की त्वरित सूझबूझ और सटीक रणनीति की बदौलत पूरे शरीर में फैले गंभीर स्टैफिलोकोकल संक्रमण और सेप्टिक शॉक से जूझ रहे 6 वर्ष के मासूम हिमांशु को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया गया।
बच्चे को बेहद नाजुक स्थिति में वेंटिलेटर सपोर्ट के साथ दूसरे अस्पताल से मेदांता के इमरजेंसी विभाग में लाया गया था। हिमांशु एक मामूली चोट के बाद शुरू हुए तेजी से फैलने वाले स्टैफिलोकोकल संक्रमण की चपेट में आ गया था। संक्रमण के चलते उसके फेफड़ों में गंभीर निमोनिया, एआरडीएस (ARDS), सबक्लेवियन नस में संक्रमित थक्के (थ्रॉम्बस), दिल के इंफेक्शन (इन्फेक्टिव एंडोकार्डाइटिस) और ह्यूमरस हड्डी के इंफेक्शन (ऑस्टियोमायलाइटिस) जैसी जटिल समस्याएं पैदा हो गई थीं। डॉक्टरों के अनुसार, ऐसे मामलों में मृत्यु का जोखिम 70 से 80 प्रतिशत तक होता है।
गहन चिकित्सा और एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के बावजूद स्थिति में सुधार न होते देख, पीआईसीयू हेड डॉ. अतहर जमाल की अगुवाई में विशेषज्ञों की टीम ने इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी की मदद से सबक्लेवियन नस की थ्रॉम्बेक्टॉमी (संक्रमित थक्के को हटाना) का अहम फैसला लिया। इस प्रक्रिया के महज 48 घंटे के भीतर बच्चे की हालत में अभूतपूर्व सुधार हुआ और जीवन रक्षक दवाएं बंद की जा सकीं। इसके बाद ऑर्थोपेडिक टीम ने हड्डी के संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए सफल सर्जरी की।
लगभग चार सप्ताह वेंटिलेटर पर रहने और छह सप्ताह के सटीक उपचार के बाद पेट (PET) स्कैन और इकोकार्डियोग्राफी में बच्चा पूरी तरह संक्रमण मुक्त पाया गया।
मेदांता लखनऊ के पीआईसीयू हेड डॉ. अतहर जमाल ने बताया कि 24 घंटे उपलब्ध रहने वाली डीएम-प्रशिक्षित पीडियाट्रिक इंटेंसिविस्ट टीम के त्वरित फैसलों और मल्टी-डिसिप्लिनरी दृष्टिकोण से ही यह जटिल इलाज संभव हो सका। इस सफल उपचार में डॉ. निकिता त्रिपाठी, डॉ. रोहित अग्रवाल, डॉ. सैफ एन. शाह, डॉ. रोली श्रीवास्तव, डॉ. फरज़ाना, डॉ. भावना जैन और डॉ. सुसान फिलिप सहित पूरी विशेषज्ञ टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
(आर एल पाण्डेय)
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