कम प्रोजेस्टेरोन: जानिए कैसे यह हार्मोन प्रभावित करता है फर्टिलिटी
कंसीव करने में आ रही है दिक्कत? जानिए कैसे प्रोजेस्टेरोन हार्मोन की कमी गर्भावस्था में बाधा बनती है और इसका सही समाधान।
लखनऊ। सफल गर्भधारण के लिए शरीर में कई हार्मोन मिलकर काम करते हैं और इनमें प्रोजेस्टेरोन सबसे महत्वपूर्ण हार्मोन में से एक है। फर्टिलिटी की शुरुआती बातचीत में अक्सर इसका ज़िक्र कम होता है, लेकिन गर्भ ठहरने और उसे स्वस्थ तरीके से आगे बढ़ाने में इसकी भूमिका बेहद अहम होती है। कई महिलाओं में गर्भधारण में देरी की एक बड़ी वजह प्रोजेस्टेरोन की कमी होती है, लेकिन सही समय पर जांच न होने के कारण इसका पता नहीं चल पाता।
डॉ. श्रेया गुप्ता, फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, लखनऊ ने कहा कि ओव्यूलेशन के बाद शरीर में प्रोजेस्टेरोन बनने लगता है। इसका मुख्य काम गर्भाशय की अंदरूनी परत को इस तरह तैयार करना होता है कि फर्टिलाइज अंडा वहां आसानी से जुड़ सके और उसका विकास शुरू हो सके। अगर शरीर में प्रोजेस्टेरोन पर्याप्त मात्रा में न बने, तो गर्भाशय की परत उतनी मजबूत नहीं बन पाती, जिससे गर्भ ठहरने या शुरुआती हफ्तों तक उसे बनाए रखने में दिक्कत आ सकती है।
प्रोजेस्टेरोन की कमी फर्टिलिटी को कैसे प्रभावित करती है?
प्रोजेस्टेरोन की कमी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके लक्षण हमेशा साफ़ दिखाई नहीं देते। कई महिलाओं के मासिक चक्र बिल्कुल नियमित होते हैं और उन्हें कोई खास परेशानी भी महसूस नहीं होती। पीरियड्स शुरू होने से पहले हल्की ब्लीडिंग या लंबे समय तक गर्भधारण न होना जैसी बातों को अक्सर तनाव या थकान का असर मानकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।
कई मामलों में अंडा फर्टिलाइज तो हो जाता है, लेकिन गर्भाशय की परत पर्याप्त रूप से तैयार न होने के कारण वह ठीक से चिपक नहीं पाता। कुछ मामलों में गर्भ ठहर भी जाता है, लेकिन शुरुआती हफ्तों में ही रुक जाता है। ऐसे में कई बार असली वजह सामने ही नहीं आ पाती।
शोध और इलाज हमें क्या बताते हैं
कई अध्ययनों में पाया गया है कि जिन महिलाओं में प्रोजेस्टेरोन की कमी होती है, उनमें सही समय पर प्रोजेस्टेरोन सपोर्ट देने से गर्भधारण की संभावना और शुरुआती गर्भावस्था को बनाए रखने की संभावना बेहतर हो सकती है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि स्वस्थ गर्भावस्था में इस हार्मोन की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।
अच्छी बात यह है कि समय पर पहचान होने पर इसका इलाज संभव है। खून की जांच और ओव्यूलेशन की निगरानी के जरिए प्रोजेस्टेरोन के स्तर का पता लगाया जा सकता है। अगर इसकी कमी की पुष्टि होती है, तो डॉक्टर जरूरत के अनुसार प्रोजेस्टेरोन सप्लीमेंट्स और अन्य हार्मोन से जुड़ी समस्याओं का इलाज शुरू कर सकते हैं।
प्रोजेस्टेरोन की कमी का मतलब यह नहीं है कि स्वस्थ गर्भावस्था संभव नहीं है। सही समय पर जांच, सही इलाज और विशेषज्ञ की सलाह से कई महिलाएं सफलतापूर्वक गर्भधारण करती हैं और स्वस्थ गर्भावस्था का अनुभव करती हैं। अक्सर इसकी शुरुआत सही समय पर सही कारण की पहचान से होती है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)